नई दिल्ली: IVF और अन्य सहायक प्रजनन तकनीकों (ART) के लिए तय उम्र सीमा को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई है. 53 और 55 साल की दो महिलाओं ने ART (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 में तय अधिकतम उम्र सीमा को चुनौती दी है. कानून के तहत 21 से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं को ही IVF जैसी तकनीकों की इजाजत है, जिसके कारण दोनों महिलाओं को इलाज से इनकार कर दिया गया था.

महिलाओं ने गर्भधारण के लिए खुद को बताया फिट

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह उम्र सीमा मनमानी और भेदभावपूर्ण है तथा उनके मातृत्व और प्रजनन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है. महिलाओं ने कोर्ट में यह भी तर्क दिया कि उन्होंने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा किए हैं, जिनमें खुद को गर्भधारण के लिए शारीरिक रूप से फिट बताया गया है. उनका कहना है कि पात्रता उम्र के बजाय व्यक्तिगत मेडिकल जांच के आधार पर तय होनी चाहिए.

कोर्ट ने क्या कहा?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतिम फैसला सुरक्षित रखते हुए संतुलित रुख अपनाया है. कोर्ट ने माना कि 50 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भावस्था से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं और इस मुद्दे पर अदालत के समक्ष निर्णायक वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने याचिका को खारिज भी नहीं किया.

HC ने महिलाओं को दी मेडिकल टेस्ट की इजाजत

अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने दोनों महिलाओं को गर्भधारण की क्षमता और फिटनेस जांच के लिए मेडिकल टेस्ट कराने की अनुमति दे दी है. हालांकि, अदालत ने साफ किया है कि इसका मतलब IVF की मंजूरी देना नहीं है. कोर्ट ने मामले के कानूनी और चिकित्सकीय पहलुओं पर गहन विचार के लिए विशेषज्ञ राय मांगी है और एक एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) भी नियुक्त किया है.

अब अगली सुनवाई में मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय के आधार पर यह तय होगा कि IVF के लिए तय उम्र सीमा में किसी तरह की छूट दी जा सकती है या नहीं.

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