गुवाहाटी: असम के नगांव की एक अदालत ने मॉब लिंचिंग केस में अहम फैसला सुनाया है। 2018 में असम के कार्बी आंगलोंग ज़िले में गुवाहाटी के दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मॉब लिंचिंग के मामले में 20 दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है। नगांव के ज़िला सत्र न्यायाधीश डीजे महंत ने सोमवार को 45 आरोपियों में से 20 को IPC की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। इन धाराओं में गैर-कानूनी भीड़ द्वारा हत्या, दंगा करना, सरकारी कर्मचारी को उसके आधिकारिक कर्तव्य निभाने से रोकना और जानबूझकर चोट पहुंचाना शामिल है।
अदालत ने 25 अन्य लोगों को बरी कर दिया, यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ अपराध साबित करने में विफल रहा। दोषियों के वकील, मानस सरानिया ने कहा कि अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है और प्रत्येक पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। हम गुवाहाटी हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देंगे।
दोषी के वकील बोले- गुवाहाटी हाई कोर्ट में करेंगे अपील
दोषियों के वकील ने कहा कि इस मामले में हत्या के आरोप के तहत दोषी ठहराने के लिए ज़रूरी तत्व मौजूद नहीं हैं। उन्हें IPC के तहत केवल ‘गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide not amounting to murder)’ के आरोप में दोषी ठहराया जाना चाहिए था, क्योंकि उनका मारने का कोई इरादा नहीं था। विशेष लोक अभियोजक ज़ेड कामर ने कहा कि सच कहूं तो, मैं इस फैसले से संतुष्ट नहीं हूं, क्योंकि मेरी राय में, यह Rarest of rare) मामलों में से एक था। हालांकि अदालत ने कहा कि यह रेयरेस्ट ऑफ द रेयर का मामला नहीं है और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई।
इंजीनियर और कारोबारी की पीट-पीटकर हुई थी हत्या
पुलिस ने इस मामले के सिलसिले में 48 लोगों को गिरफ्तार किया था। तीन आरोपी नाबालिग थे और उन्हें जोरहाट किशोर गृह में रखा गया है। यह फैसला 8 जून, 2018 को साउंड इंजीनियर निलोत्पल दास (29) और व्यवसायी अभिजीत नाथ (31) की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने के सात साल और 10 महीने बाद आया है। यह घटना कार्बी आंगलोंग के दोकमोका पुलिस थाने के अंतर्गत कांगथिलांगसो में हुई थी, जब भीड़ को उन पर बच्चा चोर होने का शक हुआ था।
दास और नाथ कांगथिलांगसो पिकनिक स्थल पर घूमने गए थे और लौटते समय उन्हें पंजुरी में रोक लिया गया। वहां गांव वालों ने उन्हें उनकी गाड़ी से बाहर खींच लिया और उनके साथ मारपीट की। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दोनों को यह कहते हुए गिड़गिड़ाते हुए दिखाया गया था कि वे बच्चा चोर नहीं हैं, बल्कि कार्बी आंगलोंग घूमने आए हैं। पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, लेकिन रास्ते में ही दोनों की मौत हो गई। पहली सुनवाई 8 नवंबर, 2018 को दीफू कोर्ट में हुई थी, जिसके बाद गुवाहाटी हाई कोर्ट ने इस मामले को नगांव के ज़िला और सत्र न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित कर दिया।

