एग्जिट पोल का पहला, महत्वपूर्ण, परिवर्तनकारी अनुमान यह है कि सात में से पांच पोल्स ने पश्चिम बंगाल में भाजपाई सत्ता का अनुमान लगाया है। विभिन्न एग्जिट पोल्स का सार-रूप पोल यह है कि भाजपा को 166 और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को 121 सीटें मिल सकती हैं। बंगाल में 294 सदस्यों की विधानसभा है, लिहाजा सामान्य बहुमत का आंकड़ा 148 माना जाता है। इस बार बंगाल में बंपर मतदान हुआ है। दोनों चरणों में कुल मतदान 92.84 फीसदी हुआ है। अकेले दूसरे चरण में ही 92.48 फीसदी मतदान किया गया। यकीनन यह अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मतदान है। कारण जो भी हो, लेकिन ऐसे मतदान के लिए मतदाता ही बधाई और जागृति के पात्र हैं। ऐसे मतदान का निष्कर्ष कुछ भी हो सकता है। उस निष्कर्ष के लिए 4 मई तक का इंतजार करना चाहिए। वैसे हम भारत में एग्जिट पोल को वैज्ञानिक नहीं मानते, क्योंकि बंगाल में मतदान शाम 6 बजे के बाद भी जारी था, लेकिन एग्जिट पोल के आंकड़े अपराह्न 3 बजे के आसपास ही टीवी चैनलों को भेज दिए गए। इस तरह मतदाताओं का रुझान कैसे आंका जा सकता है? पोल्स का साइज कितना बड़ा था, कितने मतदाताओं से बातचीत की गई, कितने समय बातचीत हुई, उनके ब्यौरे सार्वजनिक नहीं किए जाते, नतीजतन एग्जिट पोल औंधे मुंह गिरते रहे हैं। भारतीय राजनीति के संदर्भ में अक्सर एग्जिट पोल अथवा सर्वेक्षण गलत साबित होते रहे हैं। मसलन-2004 में ‘भारत उदय’ के मुद्दे पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार की बरकरारी के अनुमान लगभग सभी पोल्स में लगाए गए थे, लेकिन भाजपा 138 सीटों पर ही ठहर गई और 145 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी।

बाद में यूपीए के बैनर तले ‘खिचड़ी सरकार’ बनी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए को 415 सीटें जीतने की भविष्यवाणी की गई थी। भाजपा 240 सीटों पर और कुल एनडीए 293 सीटों पर ही ठहर गए। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा आदि राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और सहयोगी दलों की सरकारें बनने के अनुमान लगाए गए थे, लेकिन तीनों महत्वपूर्ण राज्यों में भाजपा सरकारें बनीं। ओडिशा में भी भाजपा सरकार बनी। महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी (अजित पवार) के साथ भाजपा के गठबंधन को नया नाम भी दिया गया-‘महायुति।’ एग्जिट पोल्स के गलत साबित होने के अनेक उदाहरण हैं, लेकिन हम फिर भी उन्हें न तो खारिज कर रहे हैं और न ही पूरी तरह स्वीकार करने की मन:स्थिति में हैं। बेशक असम में भाजपा, तमिलनाडु में द्रमुक गठबंधन, पुडुचेरी संघशासित क्षेत्र में एनडीए और केरलम में कांग्रेस नेतृत्व के यूडीएफ के सत्ता में आने के आसार पर्याप्त थे, लिहाजा पोल्स के अनुमान भी उन्हीं लाइनों पर हैं। केरलम में बीते 10 साल से वामदलों के एलडीएफ की सरकार थी, लिहाजा अब जनादेश यूडीएफ के पक्ष में स्वाभाविक लग रहा था। हालांकि तमिलनाडु में ‘एक्सिस माई इंडिया’ ने सुपरस्टार विजय की नवजात पार्टी टीवीके को 98-120 सीटें दी हैं। यानी द्रमुक और अन्नाद्रमुक गठबंधन हार रहे हैं। यह बड़ा असामान्य अनुमान लगता है। तमिलनाडु में सामान्य बहुमत 118 सीट का है। यदि तमिल जनादेश यही रहा और बंगाल का जनमत भाजपाई रहा, तो ये चुनावी नतीजे किसी चमत्कार से कम नहीं होंगे। बंगाल में परिवर्तन की भावनाओं का चुनाव था, तो ममता बनर्जी की 15 साल की सत्ता के बावजूद स्वीकार्यता कम नहीं है। कमोबेश 75-80 फीसदी मुस्लिम वोट, महिलाओं और हिंदुओं का बराबर का समर्थन आज भी ‘दीदी’ के पक्ष में है। आश्चर्य होता है कि ममता किन क्षेत्रों में इतना हार गईं कि सत्ता के बाहर होती लग रही हैं। यदि बंगाल में ऐसा जनादेश सामने आता है, तो ‘जनसंघ’ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मस्थली में ‘कमल’ खिलेगा और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अधूरी ख्वाहिश पूरी होगी।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
Exit mobile version