सोचिए… एक लग्जरी क्रूज, जिसपर लाखों रुपए का टिकट लेकर लोग अटलांटिक महासागर घूमने और मजे करने गए हों. लेकिन एक डरावना वायरस आता है और यह सफर अचानक मौत और अनिश्चितता में बदल जाए. समुद्र के बीच जहाज फंसा हो, किनारे पर जाने की इजाजत न मिले और अंदर बीमारी फैलने का डर हो- ऐसा ही कुछ इस हफ्ते हुआ. एक- दो लोगों के साथ नहीं, कुल 155 लोगों के साथ.  एक अमेरिकी ट्रैवल इंफ्लुएंसर रोते हुए दुनिया को बता रहा है कि हालात कितने खराब हैं. यह सिर्फ खबर नहीं, बल्कि उन लोगों की सच्ची कहानी है जो इस समय डर के बीच फंसे हुए हैं.

क्या है पूरा मामला

‘हंता वायरस’ का यह प्रकोप ‘एमवी होंडियस’ नाम के एक पोलर क्रूज जहाज पर सामने आया है, जिसे ‘ओशनवाइड एक्सपीडिशंस’ कंपनी चलाती है. शिप ने 20 मार्च को अर्जेंटीना के उशुआइया से सफर शुरू किया था और चार मई को केप वर्डे पहुंचने वाला था. लेकिन इस क्रूज शिप पर ‘हंता वायरस’ का संक्रमण फैल गया है. अबतक तीन लोगों की मौत हो गई है. यह जानकारी सोमवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने दी. इस क्रूज शिप पर लगभग 155 यात्री सवार थे. इस जहाज की लंबाई लगभग 107.6 मीटर है और इसमें 170 तक यात्री रह सकते हैं.

WHO ने बताया कि वह इस घटना पर नजर रखे हुए है और मदद भी कर रहा है. कुल छह लोगों में संक्रमण की आशंका है, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है और एक व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका में आईसीयू में भर्ती है. WHO ने ‘एक्‍स’ पर कहा, “अटलांटिक महासागर में चल रहे एक क्रूज जहाज से जुड़ी इस घटना से हम वाकिफ हैं और मदद कर रहे हैं. अभी तक एक ‘हंता वायरस’ केस लैब में पुष्‍ट हुआ है और पांच अन्य संदिग्ध हैं. इन छह लोगों में से तीन की मौत हो चुकी है और एक की हालत गंभीर है.”

यह स्पष्ट नहीं था कि संक्रमण कैसे शुरू हुआ होगा. मरने वाले यात्रियों में से एक जर्मन का शव अभी भी क्रूज पर ही है. अधिकारियों ने कहा कि 11 अप्रैल को जहाज पर 70 वर्षीय एक डच व्यक्ति की मृत्यु हो गई और उसकी 69 वर्षीय पत्नी की जहाज छोड़ने के बाद दक्षिण अफ्रीका में मृत्यु हो गई. दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उसके ब्लड में बाद में वायरस की पुष्टि हुई, जिससे दो मामलों की पुष्टि हुई.

ओशनवाइड एक्सपीडिशन के अनुसार, बाकि के 87 यात्रियों में से 17 अमेरिकी, 19 यूके से और 13 स्पेन से हैं. चालक दल (क्रू) के 61 सदस्य भी जहाज पर हैं. ओशनवाइड ने अपने बयान में कहा कि क्रू के दो बीमार सदस्यों में सांस संबंधी लक्षण हैं और उन्हें तत्काल चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है.

इंफ्लुएंसर ने क्या बताया

जेक रोसमारिन बोस्टन के रहने वाले ट्रैवल ब्लॉगर हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 44,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. उन्होंने इस डच झंडे वाले जहाज से एक भावुक वीडियो पोस्ट किया है. वीडियो में उन्होंने कहा, “मैं आम तौर पर इस तरह वीडियो नहीं बनाता, लेकिन मुझे लगता है कि मुझे कुछ कहना चाहिए. इसलिए मैंने कुछ बातें लिखी हैं. मैं अभी जहाज पर हूं और यहां जो हो रहा है, वह हमारे लिए बहुत असली है.”

उन्होंने कहा, “हम सिर्फ एक खबर नहीं हैं. हम सिर्फ हेडलाइन नहीं हैं. हम लोग हैं, जिनके परिवार हैं, जिनके घर पर लोग हमारा इंतजार कर रहे हैं. यहां बहुत अनिश्चितता है, और यही सबसे मुश्किल चीज है. हम बस सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं, साफ जानकारी चाहते हैं और घर वापस जाना चाहते हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “अगर आप इस खबर को देख रहे हैं, तो याद रखें कि इसके पीछे असली लोग हैं. यह कोई दूर की जगह पर हो रही घटना नहीं है.. यह अभी हमारे साथ हो रहा है. जब मैं और जानकारी दे पाऊंगा, तब शेयर करूंगा, लेकिन अभी के लिए मैं सिर्फ आपकी समझ और दया चाहता हूं.”

क्या होता है और कैसे फैलता है ‘हंता वायरस’?

हंता वायरस ऐसे वायरसों का समूह है, जो आमतौर पर चूहों जैसे रोडेन्ट्स में पाया जाता है और इंसानों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है. यह संक्रमण आमतौर पर संक्रमित चूहों या उनके पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से फैलता है. इंसान से इंसान में इसका फैलना बहुत कम होता है. इसके लिए कोई वैक्सीन नहीं है.

यह वायरस तब फैलता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित चूहों के पेशाब, मल या लार को छूता है या उनसे दूषित सतह के संपर्क में आता है. अक्सर यह तब होता है जब लोग ऐसे स्थानों की सफाई करते हैं, जहां चूहों का ज्यादा प्रकोप होता है. गांवों, जंगलों, खेतों और फार्म जैसे इलाकों में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि वहां चूहों की संख्या अधिक होती है.

हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम से होने वाली बीमारी (एचपीएस) में शुरुआत में सिरदर्द, चक्कर आना, ठंड लगना, बुखार और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं. इसके साथ ही उल्टी, दस्त, जी मिचलाना और पेट दर्द जैसी पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. बाद में अचानक सांस लेने में दिक्कत और ब्लड प्रेशर गिरने जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है. इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 2 से 4 हफ्ते बाद दिखते हैं. हालांकि कुछ मामलों में यह लक्षण एक हफ्ते के भीतर भी आ सकते हैं, जबकि कभी-कभी 8 हफ्ते बाद तक भी सामने आ सकते हैं.

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