तेहरान: ईरान ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए हर तरह के जहाज को एक ईमेल करना होगा और उसके बाद ही उन्हें होर्मुज पार करने की इजाजत दी जाएगी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। ईरान के सरकारी चैनल ‘प्रेस टीवी’ ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर अब एक “संप्रभु शासन प्रणाली” लागू हो गई है। इसी जलमार्ग से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। इस प्रणाली के तहत जो शिपिंग कंपनियां इस जलमार्ग से गुजरने की योजना बना रही हैं उन्हें अब ‘फारसी खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण’ (PGSA) से जुड़े एक पते से इलेक्ट्रॉनिक निर्देश प्राप्त होंगे।

इस संदेस में जहाजों को कैसे गुजरना है इसके लिए तमाम नियम और शर्तें विस्तार से बताई जाएंगी और इनका पालन सभी अंतर्राष्ट्रीय जहाजों को करना होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि जहाजों को होर्मुज जलमार्ग में प्रवेश करने से पहले अपने संचालन में आवश्यक बदलाव करने होंगे और एक “पारगमन अनुमति” हासिल करनी होगी। आपको बता दें कि इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी पर ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए थे और उसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। इसके बाद से अभी तक ये संकरा रास्ता अभी तक सामान्य नहीं हो पाया है।

‘भारत से भी टोल वसूलेगा ईरान’

यूनिवर्सिटी ऑफ तेहरान के प्रोफेसर सैयद मोहम्मद मरांडी ने भारतीय मीडिया ऑउटलेट ‘द रेड माइक’ से बात करते हुए कहा कि “भारत एक मित्र है लेकिन होर्मुज टोल सभी पर लागू होगा”। आपको बता दें कि प्रोफेसर मरांडी उस दल का हिस्सा हैं जो अमेरिका से युद्धविराम के बाद शांति वार्ता पर बात करने के लिए इस्लामाबाद गया था। उन्होंने कहा कि ‘होर्मुज स्ट्रेट पर कोई समझौता नहीं होगा।’ इसके अलावा उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात को अमेरिका का ‘प्रॉक्सी’ बताया है। उन्होंने कहा कि “इजरायल भारत को ईरान के साथ अच्छे संबंध रखने की अनुमति नहीं देगा।” भारत के साथ रिश्तों को लेकर प्रोफेसर मरांडी ने कहा कि “भारत और ईरान के बीच रिश्तों को एक ऐतिहासिक ऊंचाई तक ले जाने की क्षमता है।”

प्रोफेसर मरांडी ने कहा कि भारत ने ईरान से बात की और भारतीय जहाजों को होर्मुज पार करने दिया गया लेकिन जिन देशों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में भाग लिया चाहे वो सऊदी अरब हों, संयुक्त अरब अमीरात हो, कतर, बहरीन या कुवैत हैं जिन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध में भाग लिया उनके जहाज पर प्रतिबंध हैं। उनसे ‘द रेड माइक’ ने सवाल पूछा था कि ‘क्या भारतीय जहाजों से भी टोल वसूला जाएगा और आने वाले महीनों और वर्षों में ईरान-भारत के संबंध कैसे होंगे?’ इसपर प्रोफेसर मरांडी ने कहा “ईरान होर्मुज से गुजरने वाले हर एक जहाज से टोल वसूलेगा और ये संसद और सरकार को तय करना है कि जहाजों से कितना टोल वसूला जाना है। ईरान ने वर्षों तक अपना पैसा खर्च कर इस रास्ते की रक्षा की है और अमेरिका की वजह से होर्मुज बंद हुआ है।”

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