ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो चुका है। जिस ऑप्रेशन ने आतंक के नैटवर्क को करारा जवाब दिया, उसने एक बात बिल्कुल साफ कर दी-आज उत्तर प्रदेश भारत की रक्षा निर्माण क्रांति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। देश आज हमारी सेना के शौर्य का जश्न मना रहा है लेकिन उन फैक्ट्रियों, मिसाइल यूनिट्स और डिफैंस कॉरिडोर को भी पहचान मिलनी चाहिए, जो उत्तर प्रदेश की धरती पर तेजी से खड़े हो रहे हैं। ये सिर्फ उद्योगों का विकास नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी सफलता की कहानी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन सरकार ने इस सपने को जमीन पर उतारने का काम किया है। पी.एम. मोदी ने डिफैंस कॉरिडोर का विजन दिया, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लगातार सहयोग दिया और योगी आदित्यनाथ ने उसे तेजी से लागू किया। आज उत्तर प्रदेश डिफैंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के 6 बड़े केंद्र-आगरा, अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर, झांसी और चित्रकूट-देश की रक्षा ताकत को नई ऊंचाई दे रहे हैं। यहां 35,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश पर तेजी से काम चल रहा है। जनवरी 2026 तक 12,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाएं शुरू हो चुकी थीं। राज्य सरकार ने बड़ी जमीन उपलब्ध कराई है और रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए विशेष सुविधाएं भी दी हैं।
अब उत्तर प्रदेश सिर्फ फैक्ट्रियां नहीं बना रहा, बल्कि युद्ध में काम आने वाले आधुनिक हथियार तैयार कर रहा है। लखनऊ आज ब्रह्मोस मिसाइल और भारी रक्षा उपकरणों का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां बनी ब्रह्मोस मिसाइलों ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी ताकत दिखाई। अलीगढ़ छोटे हथियार, ड्रोन, इलैक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रक्षा उपकरणों का बड़ा हब बन रहा है। कानपुर गोला-बारूद, मिसाइल, बुलेटप्रूफ जैकेट और रक्षा सामग्री के निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं आगरा और चित्रकूट को एयरोस्पेस और प्रिसीजन इंजीनियरिंग के लिए विकसित किया जा रहा है। आज उत्तर प्रदेश में आॢटलरी शैल, ड्रोन, बुलेटप्रूफ जैकेट और एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम बनाए जा रहे हैं। ऑप्रेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए कई ड्रोन और अन्य सिस्टम इसी कॉरिडोर से आए थे, जिन्होंने सेना को रियल टाइम जानकारी और ऑप्रेशन में मदद दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस डिफैंस कॉरिडोर को सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका लक्ष्य इसे ‘नॉलेज कॉरिडोर’ बनाना है, जहां रिसर्च और टैक्नोलॉजी भी साथ-साथ आगे बढ़े। इसी दिशा में Operation Sindoor, Uttar Pradesh, defense power of self-reliant India, Defense Corridor के साथ मिलकर ड्रोन टैक्नोलॉजी के लिए सैंटर ऑफ एक्सीलैंस बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पास देश की 56 प्रतिशत कुशल कार्यशक्ति और लगभग 96 लाख एम.एस.एम.ईज का विशाल नैटवर्क है, जो इसे रक्षा निर्माण के लिए सबसे मजबूत राज्य बनाता है। राज्य में 21,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स भी शुरू हुए हैं, जो ए.आई., रोबोटिक्स, ड्रोन, सैमीकंडक्टर और डाटा सैंटर जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें से कई अब रक्षा क्षेत्र से भी जुड़ रहे हैं। इस पूरी सफलता की सबसे बड़ी ताकत रही है डबल इंजन सरकार का तालमेल। प्रधानमंत्री मोदी ने विजन दिया, राजनाथ सिंह ने केंद्र से मजबूत सहयोग दिया और योगी आदित्यनाथ ने जमीन पर उसे हकीकत बना दिया।
ऑप्रेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर देश को यह समझना चाहिए कि लखनऊ की ब्रह्मोस मिसाइलें, अलीगढ़ के ड्रोन, कानपुर का गोला-बारूद और उत्तर प्रदेश में बने अन्य रक्षा उपकरण आयात नहीं किए गए थे। ये भारत में बने थे और बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश में बने थे। यही आत्मनिर्भर भारत की असली तस्वीर है। आज उत्तर प्रदेश सिर्फ देश की रक्षा यात्रा में हिस्सा नहीं ले रहा, बल्कि उसका नेतृत्व कर रहा है। आने वाले समय में यह राज्य सिर्फ भारत की जरूरतें पूरी नहीं करेगा, बल्कि दुनिया के मित्र देशों को रक्षा उपकरण निर्यात करने वाला बड़ा केंद्र भी बनेगा। चुनौतियां अभी भी हैं, लेकिन दिशा साफ है और रफ्तार मजबूत। ऑप्रेशन सिंदूर के एक साल बाद आज उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर और शक्तिशाली भारत की सबसे मजबूत रक्षा शक्ति बनकर खड़ा है। भारत के रक्षा निर्माण का भविष्य अब उत्तर प्रदेश की धरती से उभर रहा है।-शहजाद पूनावाला

