प्रकृति में ऐसे कई रहस्य छिपे हुए हैं, जिनके बारे में जानकर लोग हैरान रह जाते हैं. दुनिया में कुछ जीव अपनी ताकत के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ अपने जहरीले हमले के लिए. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे सांप के बारे में सुना है, जो खुद जहर नहीं बनाता, बल्कि दूसरे जहरीले जीवों से जहर चुरा के खुद को खतरनाक बना लेता है? सुनने में यह भले ही आपको अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह बिल्कुल सच है. इस अनोखे सांप का नाम रेड-नेक्ड कीलबैक (Red-Necked Keelback) है. यह सांप अपनी खास आदतों और अनोखी रक्षा प्रणाली की वजह से वैज्ञानिकों के लिए भी काफी दिलचस्प बना हुआ है.

आमतौर पर जहरीले सांप अपने शरीर में खुद जहर तैयार करते हैं, लेकिन रेड-नेक्ड कीलबैक ऐसा नहीं करता. यह मुख्य रूप से जहरीले मेंढकों और टोड्स को खाता है. इन्हीं जीवों के शरीर में मौजूद जहरीले रसायनों को यह अपने शरीर में जमा कर लेता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सांप जहरीले टोड्स में पाए जाने वाले बुफाडिएनोलाइड्स (Bufadienolides) नाम के केमिकल को अपने शरीर में स्टोर करता है. यही केमिकल बाद में इसकी सुरक्षा का हथियार बन जाता है. यानी यह सांप बिना खुद जहर बनाए भी जहरीला और खतरनाक बन जाता है.

गर्दन में छिपा होता है इसका “जहरीला राज”
रेड-नेक्ड कीलबैक की गर्दन के पीछे खास तरह की ग्रंथियां (Glands) होती हैं, जिन्हें नुचल ग्लैंड (Nuchal glands) कहा जाता है. यही वह जगह है, जहां यह सांप जहरीले रसायनों को जमा करके रखता है. जब इसे खतरा महसूस होता है, तब यह अपनी गर्दन ऊपर उठाकर इन ग्रंथियों को दिखाता है. यह एक तरह की चेतावनी होती है, जिससे शिकारी डर जाएं और इस पर हमला न करें. इसकी गर्दन का लाल रंग भी शिकारी जीवों को संकेत देता है कि यह सांप खतरनाक हो सकता है.

जहर मिलते ही बदल जाता है इसका व्यवहार
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस सांप का व्यवहार उसके भोजन पर काफी हद तक निर्भर करता है. जब यह जहरीले टोड्स या फिर मेढक खाता है तो उसके शरीर में ज्यादा विष जमा हो जाता है, तब यह और भी ज्यादा आक्रामक हो जाता है. ऐसी स्थिति में यह अपनी गर्दन फैलाकर शरीर को ऊपर उठाता है और सामने वाले को डराने की कोशिश करता है. इसका पूरा व्यवहार आत्मविश्वास से भरा और हमलावर जैसा दिखाई देता है. वहीं दूसरी तरफ अगर इसे लंबे समय तक जहरीला भोजन नहीं मिलता, तो इसका व्यवहार बदल जाता है. तब यह ज्यादा सतर्क रहने लगता है और लड़ाई या टकराव से बचने की कोशिश करता है.

वैज्ञानिकों ने रिसर्च में क्या पाया?
वैज्ञानिकों ने इस सांप पर खास रिसर्च की इसका मकसद यह समझना था कि क्या यह सांप अपने शरीर में जमा विष की मात्रा को पहचान सकता है या नहीं. एक्सपेरिमेंट के दौरान वैज्ञानिकों ने इसकी नुचल ग्रंथियों से जहरीले केमिकल निकाल दिए. हालांकि इसके बाद भी इसके रक्षात्मक व्यवहार में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया. इस रिसर्च से वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि यह सांप केवल शरीर में मौजूद विष पर ही नहीं, बल्कि अपने भोजन और परिस्थितियों के आधार पर भी प्रतिक्रिया देता है. रेड-नेक्ड कीलबैक प्रकृति का एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला उदाहरण है. यह दिखाता है कि जीव-जंतु खुद को सुरक्षित रखने और जिंदा रहने के लिए कितने अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. जहां ज्यादातर सांप अपना जहर खुद बनाते हैं, वहीं यह सांप दूसरे जीवों से जहर लेकर खुद को ताकतवर बनाता है. यही खासियत इसे दुनिया के सबसे दिलचस्प सांपों में शामिल करती है.

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