नई दिल्ली. भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने रूसी तेल खरीद और संभावित प्रतिबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ बातचीत के बाद एस. जयशंकर ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, लेकिन ऊर्जा बाजार को बाजार की ताकतों पर ही छोड़ देना चाहिए. उन्होंने साफ संकेत दिया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देता रहेगा. जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस से तेल खरीद को लेकर पश्चिमी देशों का दबाव लगातार बना हुआ है.
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को लेकर पूछे गए सवाल पर भी जयशंकर ने स्पष्ट रुख रखा. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने हमेशा ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति अपनाई है, जबकि भारत का नजरिया ‘इंडिया फर्स्ट’ है. उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र जरूर हैं, जहां दोनों देशों को संतुलन बनाकर चलना होगा. जयशंकर के बयान को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक संतुलन के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है
मार्को रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्तों की रफ्तार कम नहीं हुई है और आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और मजबूत होगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द पूरा हो सकता है. भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में तेजी से मजबूत हुई है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्या बोले रूबियो
मार्को रूबियो ने कहा कि पिछले 48 घंटों में ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट को सुलझाने के लिए एक संभावित ढांचे पर कुछ प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि आज इस मुद्दे पर और खबरें सामने आ सकती हैं, हालांकि अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है. रूबियो ने दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी अन्य राष्ट्रपति से ज्यादा सक्रिय रुख अपनाया है.
भारत के लिए क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल पश्चिम एशिया से आयात करता है. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. अगर इस रास्ते में लंबे समय तक तनाव बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई और वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है. यही वजह है कि भारत लगातार समुद्री व्यापार को बिना रुकावट जारी रखने पर जोर दे रहा है.

