केंद्रपाड़ा: एक राजमिस्त्री ने अपने जीवन के तीन दशक तक एक सीक्रेट जगह पर बिताए। यह सीक्रेट जगह उसने खुद बनाई। हत्या के मामले में वांछित अपराधी, जिसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया था, पुलिस से बचता रहा। उसने छिपने के लिए जमीन में सुरंग खोदकर एक सीक्रेट कमरा बनाया और अपना जीवन वहीं बिताने लगा। वह सद्दाम हुसैन स्टाइल में यहां छिपा रहा। हालांकि 32 साल बाद वह आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

मामला ओडिशा का है। पुलिस ने यहां तलाशी अभियान चलाया और 58 वर्षीय हत्या के भगोड़े को एक भूमिगत तहखाने से बाहर निकाला। आरोप है कि उसने 1994 के एक मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने घर के नीचे यह तहखाना बनाया था।

1994 में की थी हत्या

रवींद्र मल्लिक नाम के इस शख्स पर अपने ही चचेरे भाई की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या करने का आरोप है। भुवनेश्वर से लगभग 95 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित जाजपुर जिले के नुहाट गांव से उसने यह अपराध 32 साल पहले किया था। पुलिस ने बताया कि रवींद्र मल्लिक ने कथित तौर पर 21 अक्टूबर, 1994 को परमानंद मल्लिक (27) की हत्या कर दी थी, जिसके बाद अदालत द्वारा उसे भगोड़ा घोषित किए जाने पर वह गायब हो गया।

फर्जी पहचान के दस्तावेज बनवाए

गायब होने के बाद रवींद्र ने अपनी झूठी पहचान बनाई। प्रवासी मजदूर के रूप में काम करने लगा और एक राज्य से दूसरे राज्य में घूमकर जीवन बिताने लगा। जांचकर्ताओं ने शनिवार को बताया कि उसने एक फर्जी नाम से आधार और वोटर आईडी कार्ड बनवा लिए थे, और तटीय ओडिशा के आदमपुर गांव का निवासी होने का नाटक करता था।

कई राज्यों में किया काम

आरोप है कि उसने हैदराबाद, केरल और अन्य जगहों पर राजमिस्त्री के रूप में काम किया, जबकि चुपचाप घर पर मौजूद परिवार के सदस्यों के संपर्क में भी रहा। फिर एक गुप्त सूचना मिली। जाजपुर के कुआखिया पुलिस स्टेशन के अधिकारियों को पता चला कि मल्लिक एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए चुपके से नुहाट वापस आ गया है। जब पुलिस शुक्रवार रात उसके घर पहुंची, तो उन्हें वह कथित तौर पर एक छिपे हुए बंकर के अंदर छिपा हुआ मिला।

1994 में ही बनाया था तहखाना

कुआखिया पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज सुशांत कुमार सेठी ने बताया कि हमने उसे उसके घर में बने एक छिपे हुए भूमिगत कमरे में पकड़ लिया। उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए यह गुप्त कमरा बनाया था। बताया जा रहा है कि उसने यह कमरा 1994 में बनवाया था। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि यह एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में काम करता था। अंततः, एक छिपे हुए गुप्त दरवाज़े के खुलने के साथ ही, एक भगोड़े का जीवन सबके सामने आ गया।

पुलिस ने बताया कि रवींद्र मल्लिक ने 1998 में जब वह अभी भी फरार था, मंजुलता से शादी कर ली थी। वर्षों तक भूमिगत रहने के बावजूद, वह लगातार अपनी जगह और पहचान बदलकर पकड़े जाने से बचने में कामयाब रहा।

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