राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चिकित्सा और जनजातीय स्वास्थ्य सेवा में असाधारण योगदान के लिए किया सम्मानित

तीन दशकों से नक्सल प्रभावित बस्तर में कुपोषण उन्मूलन और आदिवासी स्वास्थ्य के लिए समर्पित है दंपत्ति

नई दिल्ली- देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल ‘पद्म पुरस्कार 2026’ के गरिमामयी समारोह में सोमवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में जनजातीय स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और श्रीमती सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया। चिकित्सा सेवा, कुपोषण उन्मूलन और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए तीन दशकों से अधिक समय से किए जा रहे उनके समर्पित कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में इन विभूतियों की उत्कृष्टता, समर्पण और अथक सेवा देश के सामाजिक ताने-बाने को सुदृढ़ करती है तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि पद्म पुरस्कार विजेता समाज परिवर्तन के वास्तविक पथ-प्रदर्शक हैं, जिन्होंने अपनी सेवा भावना से ‘पीपुल्स पद्म’ की अवधारणा को साकार किया है।

राष्ट्रपति द्वारा इस वर्ष कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी प्रदान की गई थी, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कार सूची में 19 महिलाओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा, विदेशियों, अनिवासी भारतीयों (एनआरआई), भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) तथा ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) श्रेणी के 6 व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया है, जबकि 16 पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान किए गए।

राष्ट्रीय स्तर पर कला, लोक सेवा और चिकित्सा के क्षेत्र में कई विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित किया गया, जिनमें अभिनेता धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत), न्यायविद के. टी. थॉमस, विख्यात वायलिन वादक एन. राजम, पी. नारायणन तथा केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन (मरणोपरांत) को ‘पद्म विभूषण’ से अलंकृत किया गया।

मूलतः महाराष्ट्र निवासी डॉ. रामचंद्र गोडबोले, जो आयुर्वेद चिकित्सक (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी-बीएएमएस) हैं, तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले, जिन्होंने मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) की शिक्षा प्राप्त की है, ने वर्ष 1990 में विवाह के तुरंत बाद छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले स्थित बारसूर क्षेत्र में जाकर जनजातीय समाज की सेवा का संकल्प लिया था। वनवासी कल्याण आश्रम के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में डॉ. गोडबोले ने अबूझमाड़ क्षेत्र के समीप एक छोटे क्लिनिक से अपनी सेवा यात्रा प्रारंभ की और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव वाले क्षेत्रों में गरीब आदिवासी मरीजों का निःशुल्क उपचार किया।

प्रारंभिक 12 वर्षों में उन्होंने 3,000 से अधिक गंभीर रूप से बीमार आदिवासियों का उपचार किया। इसके बाद उन्होंने जंगलों के भीतर 114 से अधिक विशाल चिकित्सा शिविर आयोजित किए, जिनके माध्यम से 9,000 से अधिक ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई तथा 400 से अधिक गंभीर मरीजों को रायपुर के चैरिटेबल अस्पतालों में भेजकर उपचार उपलब्ध कराया गया।

श्रीमती सुनीता गोडबोले ने बस्तर की स्थानीय बोलियों ‘गोंडी’ और ‘हलबी’ सीखकर जनजातीय महिलाओं और बच्चों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया। उनके प्रयासों से बस्तर के तीन जिलों के 37 विद्यालयों के लगभग 2,000 बच्चे प्रतिवर्ष स्वास्थ्य और कुपोषण उन्मूलन जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़ रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में उनके व्यक्तिगत प्रयासों से 24 गांवों के 460 बच्चों को गंभीर कुपोषण से बाहर निकाला गया है।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता, बाल अधिकार संरक्षण तथा आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वर्तमान में यह दंपत्ति बस्तर में जनजातीय बच्चों के स्वास्थ्य पर केंद्रित संगठन “बनफूल” का संचालन कर रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार और राज्य प्रशासन ने गोडबोले दंपत्ति को ‘पद्म श्री’ सम्मान मिलने को राज्य के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सम्मान बस्तर के जनजातीय समाज के संघर्ष, सेवा और स्वास्थ्य अधिकारों को मिली राष्ट्रीय मान्यता है।


Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
Exit mobile version