IPL 2026 Qualifier 2: आईपीएल 2026 के क्वालीफायर-2 की तस्वीर साफ हो गई है. शुक्रवार को मुल्लांपुर के यादवेंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में गुजरात टाइटंस का सामना राजस्थान रॉयल्स से होगा. क्वालीफायर-1 में हारने के बाद गुजरात के पास फाइनल में पहुँचने का यह आखिरी मौका है. जबकि सनराइजर्स हैदराबाद को एलिमिनेटर में हराकर आ रही राजस्थान रॉयल्स के हौसले बुलंद हैं.
आंकड़े क्या कहते है
आईपीएल के प्लेऑफ इतिहास पर नजर डालें तो क्वालीफायर-2 में क्वालीफायर-1 हारने वाली टीम का दबदबा रहा है. 2011 में प्लेऑफ नियम आने के बाद से खेले गए 15 क्वालीफायर-2 मुकाबलों में से 12 बार उस टीम ने जीत दर्ज की है जो क्वालीफायर-1 हारकर आई थी. एलिमिनेटर की विजेता टीम केवल तीन बार (2012 में सीएसके, 2016 में हैदराबाद और 2021 में केकेआर) ही इस बाधा को पार कर पाई है. आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि क्वालीफायर-1 हारने वाली टीम के पास फाइनल में पहुँचने का चांस ज्यादा होता है.
क्या मुल्लांपुर में राजस्थान बदल पाएगी इतिहास
मुल्लांपुर का मैदान इस सीजन में दोनों टीमों के लिए बिल्कुल अलग अनुभव लेकर आया है. गुजरात टाइटंस के लिए यह मैदान अब तक अनलकी रहा है, जहाँ उन्हें ग्रुप राउंड के मैच के साथ-साथ मुंबई इंडियंस के खिलाफ भी हार का सामना करना पड़ा था. वहीं राजस्थान रॉयल्स के हौसले इस मैदान पर बुलंद हैं, क्योंकि उन्होंने इसी पिच पर एलिमिनेटर मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद को हराकर शानदार जीत दर्ज की थी और क्वालीफायर-2 में कदम रखा है.
गुजरात बनाम राजस्थान
आईपीएल के प्लेऑफ मैचों में गुजरात टाइटंस का पलड़ा राजस्थान रॉयल्स पर हमेशा भारी रहा है. साल 2022 में गुजरात ने राजस्थान को प्लेऑफ में हराया था. बाद में फाइनल मैच में भी राजस्थान को ही हराकर आईपीएल ट्रॉफी जीती थी. गुजरात के लिए एक और बड़ी बात यह है कि क्वालीफायर-2 मैच में सबसे ज्यादा 129 रन बनाने का रिकॉर्ड भी उनके कप्तान शुभमन गिल के नाम है.
2016 में हैदराबाद ने किया था यह कारनामा
आईपीएल के इतिहास में अब तक सिर्फ एक ही बार ऐसा हुआ है जब एलिमिनेटर खेलने वाली टीम चैंपियन बनी हो. साल 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद ने यह रिकॉर्ड बनाया था. इस बार राजस्थान रॉयल्स भी इसी इतिहास को दोहराने की कोशिश में है. अगर राजस्थान की टीम शुक्रवार को गुजरात टाइटंस को हरा देती है, तो उसे रविवार को फाइनल में आरसीबी से खेलना होगा. महज 5 दिन के अंदर तीन बड़े नॉकआउट मैच खेलना किसी भी टीम के लिए बेहद थका देने वाला और चुनौतीपूर्ण काम है.

