पंजाब की राजनीति में यह चर्चा जोरों पर चल रही है कि क्या विधानसभा के चुनाव अपने निर्धारित समय से पहले करवाए जा सकते हैं? हालांकि अभी तक सरकारी तौर पर ऐसा कोई ऐलान सामने नहीं आया, लेकिन राजनीतिक गलियारों, टी.वी. बहसों और सोशल मीडिया पर यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। समयपूर्व चुनाव होने की चर्चाओं के लिए केवल राजनीतिक नेताओं की बयानबाजी ही जिम्मेदार नहीं, बल्कि देश के अंदर चल रही एस.आई.आर., जनगणना और मौसम भी शामिल हैं। यह चर्चा क्यों शुरू हुई, इसे समझने के लिए हमें ऊपर दिए गए बिंदुओं पर विचार करने की जरूरत है।

पंजाब की राजनीतिक पाॢटयों की सरगर्मियों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि चुनाव समय से पहले हो सकते हैं क्योंकि सुखबीर सिंह बादल द्वारा लगातार रैलियां की जा रही हैं, ‘आप’ द्वारा पंजाब में 16,000 रैलियां करने का ऐलान किया गया है, कांग्रेस भी बड़ी रैलियां कर रही है और भाजपा भी मोगा में अमित शाह के नेतृत्व में बड़ी रैली करके चुनावी बिगुल बजा चुकी है। बाकी राजनीतिक पाॢटयां भी अपने-अपने तौर पर तैयारी कर रही हैं। राजनीतिक पार्टियों की इन गतिविधियों को देखकर अंदाजे लगाए जा रहे हैं कि पंजाब में चुनाव जल्दी हो सकते हैं। इसके अलावा एस.आई.आर. की प्रक्रिया शुरू होने को भी जल्दी चुनाव करवाने से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारतीय संविधान के अनुसार चुनाव विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले भी करवाए जा सकते हैं। लेकिन चुनाव आयोग चुनाव की तारीख का ऐलान करने से पहले मौसम के कारण पेश आने वाली प्रशासनिक दिक्कतों और विद्याॢथयों की परीक्षाओं की डेटशीट को भी ध्यान में रखता है, जैसे कि जुलाई-अगस्त के महीने में बाढ़ आने और कई इलाकों में पानी भरने की समस्याएं आ जाने के कारण बरसाती मौसम में चुनाव कराने से बचा जाता है। सॢदयों के चरम (पीक) समय में भी आमतौर पर चुनाव नहीं करवाए जाते क्योंकि इस मौसम में धुंध के कारण सुरक्षा और आवाजाही की समस्या आने का खतरा बना रहता है।

जनगणना का पंजाब विधानसभा के चुनावों पर भी प्रभाव पड़ सकता है या नहीं, अब इस बारे में विचार करते हैं। जनगणना का दूसरा और आखिरी महत्वपूर्ण चरण 9 फरवरी को शुरू होगा। जनगणना की प्रक्रिया 28 फरवरी तक पूरी की जानी है। 1 मार्च की रात को 12 बजे सरकार देश की जनसंख्या की गिनती का आधिकारिक तौर पर ऐलान करेगी। लेकिन यह प्रक्रिया 5 मार्च तक भी चल सकती है, क्योंकि कई जगहों पर रिवीजन राऊंड की जरूरत पड़ती है, जिस कारण सरकारी तंत्र का एक बड़ा हिस्सा 5 मार्च तक इसी काम में व्यस्त होगा।
यदि ऊपरोक्त कारणों पर नजर डालें तो यह लगता है कि पिछले चुनावों के मुताबिक फरवरी में पंजाब विधानसभा के चुनाव होने लगभग मुश्किल लगते हैं क्योंकि जनगणना का दूसरा चरण 9 फरवरी को शुरू होने के कारण मुलाजिमों को कम से कम जनवरी के आखिरी हफ्ते में जनगणना के काम के लिए ट्रेनिंग प्रोग्रामों में शामिल होना पड़ेगा।

इस तरह 5 मार्च को जनगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव करवाना संवैधानिक मुश्किल खड़ी कर सकता है क्योंकि 5 मार्च के बाद यदि चुनाव प्रक्रिया शुरू होती है, तो पिछली विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकेगी।

जनगणना 9 फरवरी को शुरू होनी है, उससे ठीक पहले भी चुनाव करवाने में मुश्किल आ सकती है क्योंकि जनवरी में सर्दी का मौसम चरम पर होने के कारण धुंध सुरक्षा, चुनावी अमले और वोटरों की आवाजाही को प्रभावित कर सकती है, इस कारण चुनाव प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

इस तरह चुनाव आयोग के पास चुनाव करवाने के लिए एस.आई.आर. की प्रक्रिया खत्म होने पर, जो कि 1 अक्तूबर तक होनी है और जनवरी में सर्दी का मौसम चरम पर पहुंच जाने के कारण, यह समय चुनाव करवाने का उपयुक्त समय नहीं रहेगा। इसलिए चुनाव आयोग के पास चुनाव करवाने के लिए अक्तूबर से लेकर नवम्बर महीने का समय ही बचता है। इसलिए यह प्रबल संभावना है कि पंजाब के चुनाव समय से पहले अक्तूबर या नवम्बर में करवा दिए जाएं।-इकबाल सिंह चन्नी

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