Purushottam Maas Upay: सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना गया है. यह महीना भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु की विशेष आराधना के लिए समर्पित होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस पवित्र मास में किए गए जप, तप, दान और पूजा का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है. विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना गया है.

पुरुषोत्तम मास में करें यह विशेष उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन दंपतियों को अभी तक संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर जाकर विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए. माना जाता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान के चरणों में चार विशेष फल अर्पित करने से संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण हो सकती है.

नारियल अर्पित करें

सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में नारियल अर्पित करें. नारियल चढ़ाते समय “ॐ पुराण पुरुषोत्तमाय नमः” मंत्र का उच्चारण करें. नारियल को पूर्णता, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है.

बिल्व फल चढ़ाएं

दूसरे चरण में बिल्व फल अर्पित करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें. यह मंत्र भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है.

सीताफल का करें अर्पण

तीसरे क्रम में भगवान को सीताफल अर्पित करें. इस दौरान “ॐ श्री सुभद्राय नमः” मंत्र का उच्चारण करें. मान्यता है कि इससे परिवार में सुख, शांति और संतति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

नारंगी या सुपारी का फल चढ़ाएं

अंत में नारंगी या सुपारी का फल भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें और “ॐ श्री वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें. धार्मिक विश्वास है कि इस उपाय को श्रद्धापूर्वक करने से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
Exit mobile version