मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा. शेयर बाजार खुला, सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम. इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी में गिरावट आई. इधर घरेलू कमोडिटी मार्केट खुलते ही सोना-चांदी भी धड़ाम. जो निवेशक पहले पैसे लगा चुके हैं, वे थोड़े निराश हुए और जो पैसे लगाना चाहते हैं, वे इसे मौके के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि पैसे लगाने से पहले निवेश सलाहकार से बात जरूर कर लेना चाहिए. बहरहाल, ताजा खबर यही है कि चांदी धड़ाम और सोने के भी गिर गए दाम. कितने गिरे, हम बता दे रहे हैं.
चांदी धड़ाम, 5,600 रुपये गिर गए दाम
सोमवार को घरेलू कमोडिटी मार्केट में चांदी के दाम भरभरा कर गिर गए. 3 जुलाई की डिलीवरी वाली चांदी के भाव में 5,600 रुपये से ज्यादा की गिरावट देखी गई और भाव 2.43 लाख रुपये के नीचे आ गए. सुबह 10:03 बजे सिल्वर 2.27% या 5,643 रुपये की गिरावट के साथ 2,42,894 रुपये के भाव पर ट्रेड करता दिखा.
सोना भी गिरा, कितना सस्ता हो गया?
चांदी के साथ-साथ सोने के भाव भी सोमवार को गिर गए. सोना 1,800 रुपये तक सस्ता हो गया और भाव 1.54 लाख रुपये के नीचे आ गए. 5 अगस्त की डिलीवरी वाला गोल्ड सुबह 10.11 बजे 1.15 फीसदी या 1,794 रुपये की गिरावट के साथ् 1,53,800 रुपये के भाव पर ट्रेड करता दिखा.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्यों मची खलबली?
ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) 0.4% गिरकर 4,313.11 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. पिछले हफ्ते सोने में करीब 5% की गिरावट देखी गई थी, जो मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है. अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.7% की गिरावट के साथ 4,336.30 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती ने सोने पर दबाव बनाया है.
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का डर
सोने की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका से आए मजबूत लेबर मार्केट के आंकड़े हैं。 मई में लगातार तीसरे महीने रोजगार के शानदार आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व (Fed) को ब्याज दरें बढ़ाने या उन्हें स्थिर रखने के लिए और जगह दे दी है. बाजार को अब 72% उम्मीद है कि दिसंबर तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है. आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोने की मांग कम हो जाती है.
मिडिल ईस्ट तनाव और महंगाई की चिंता
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जिसके जवाब में इजरायल ने भी ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए. इस तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 2 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा बढ़ गई हैं. तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जो केंद्रीय बैंकों को सख्त मौद्रिक नीति अपनाने पर मजबूर कर सकता है.

