मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का सीधा असर आज भारतीय शेयर बाजार में देखने को मिला है। मार्केट में जबरदस्त गिरावट देखी जा रही है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 822 अंक की गिरावट के साथ 73,421.61 पर खुला। शुरुआती कारोबार में 9 बजकर 40 मिनट पर यह 705 अंक की गिरावट के साथ 73,551 पर ट्रेड करता दिखा। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी इस समय 0.85 फीसदी या 195 अंक की गिरावट के साथ 23,168 पर ट्रेड करता दिखा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट दिखी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से 5 शेयर हरे निशान पर और 25 शेयर लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे।
रियल्टी और आईटी शेयरों में गिरावट
सेक्टोरल सूचकांकों की बात करें, तो आज सबसे अधिक गिरावट निफ्टी रियल्टी में 1.91 फीसदी, निफ्टी आईटी में 1.87 फीसदी, निफ्टी मेटल में 1.36 फीसदी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.17 फीसदी, निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 1.20 फीसदी, निफ्टी केमिकल्स में 1.52 फीसदी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेस एक्स-बैंक में 1.02 फीसदी देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.82 फीसदी, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.55 फीसदी और निफ्टी एफएमसीजी में 0.51 फीसदी की गिरावट दिखाई दी। इससे इतर निफ्टी फार्मा में 0.19 फीसदी, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.61 फीसदी और निफ्टी हेल्थकेयर में 0.22 फीसदी की तेजी देखने को मिली।
क्यों गिरा शेयर बाजार?
मिडिल ईस्ट संकट
सबसे ज्यादा चिंता की वजह इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता टकराव बना हुआ है। सोमवार को इजरायल ने पश्चिमी और मध्य ईरान में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पहले लेबनान के बेरूत क्षेत्र में भी हमले किए गए थे। जवाब में ईरान ने मिसाइलों की बौछार कर दी। हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
कच्चे तेल में तेज उछाल
युद्ध का असर सबसे पहले तेल बाजार में दिखाई दिया। निवेशकों को डर है कि अगर संघर्ष और बढ़ा तो दुनिया की तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से तक कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। इसी चिंता के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव 96 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी क्रूड भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा। मार्च से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है।
महंगाई बढ़ने का डर
तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे देशों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है, चालू खाते पर दबाव आता है और रुपये पर भी असर पड़ सकता है। इसका असर महंगाई और आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है।
ब्याज दर बढ़ने का डर
इस बीच अमेरिका से आई एक और खबर ने बाजारों की बेचैनी बढ़ा दी। मई महीने के रोजगार आंकड़े उम्मीद से कहीं बेहतर रहे। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पिछले महीने 1.72 लाख नई नौकरियां जुड़ीं, जबकि बाजार इससे काफी कम आंकड़े की उम्मीद कर रहा था। सामान्य तौर पर मजबूत रोजगार आंकड़े अच्छी खबर माने जाते हैं, लेकिन इस बार निवेशकों ने इसे अलग नजरिए से देखा। मजबूत जॉब मार्केट का मतलब है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है या फिर आगे बढ़ा भी सकता है। अब दिसंबर 2026 तक फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना तेजी से बढ़ गई है। यही वजह है कि निवेशकों ने जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर दिया। आमतौर पर जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो भारत समेत उभरते बाजारों में विदेशी निवेश का प्रवाह कमजोर पड़ सकता है।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों में गिरावट
इन सभी कारणों का असर एशियाई बाजारों पर साफ दिखाई दिया। जापान का निक्केई करीब 4 फीसदी टूट गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी भारी दबाव में रहा। हांगकांग का हैंग सेंग और चीन का सीएसआई 300 इंडेक्स भी गिरावट में रहे। अमेरिकी बाजारों ने पहले ही कमजोर संकेत दे दिए थे। शुक्रवार को टेक्नोलॉजी शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली थी, जिसके चलते नैस्डैक अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज कर चुका है। डाउ जोन्स और एसएंडपी 500 भी भारी नुकसान के साथ बंद हुए थे।

