कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की बागवत में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान के भी शामिल होने का दावा किया जा रहा है। महुआ मोइत्रा के बाद कल्याण बनर्जी ने कहा है कि उन्हें अमित शाह ने दिल्ली मिलने के लिए बुलाया था, इस सब के बीच यूसुफ पठान द्वारा वडोदरा में सरकारी जमीन कब्जाने पर हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद से तीख सवाल पूछे हैं। हाई कोर्ट ने पूछा कि जरूरी अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी किए बिना उन्होंने जमीन का कब्जा कैसे ले लिया। यूसुफ पठान के ऊपर वडोदरा नगर निगम के प्लॉट पर कब्जे का आरोप है।

चीफ जस्टिस की डबल बेंच ने की सुनवाई

चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी.एन. रे की बेंच ने सिंगल जज के अगस्त 2025 के आदेश के खिलाफ पठान की अपील पर सुनवाई करते हुई यह कठोर टिप्पणी की। पिछले आदेश में पठान को सरकारी जमीन पर अतिक्रमणकारी घोषित किया गया था, क्योंकि पाया गया था कि उनके पक्ष में कोई अलॉटमेंट ऑर्डर जारी नहीं किया गया था और वह बिना कोई भुगतान किए उस ज़मीन पर कब्ज़ा किए हुए थे। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त पर हुआ है जब टीएमसी सांसदों में टूट को लेकर कोलाकता से लेकर दिल्ली तक सियासत गरमाई हुई। यूसुफ पठान टीएमसी के बहरामपुर से सांसद हैं। उनका नाम उन सांसदों में लिया जा रहा है जो बागी गुट में हैं। जिन्होंने एनडीए को समर्थन देने की बात कही है। यूसुफ पठान मूलरूप से वडोदरा के रहने वाले हैं।

हाईकोर्ट में क्या कुछ हुआ?

  • कोर्ट में सामने आया कि यूसुफ पठान का जमीन अलॉट करने का सिर्फ एक प्रस्ताव था।
  • जिसे बाद में राज्य सरकार ने खारिज कर दिया था। इसके बाद यह मामला कोर्ट पहुंचा।
  • बेंच ने पठान के वकील से पूछा कि उनके क्लाइंट को जमीन खाली करने में कितना समय लगेगा।
  • कोर्ट ने संकेत दिया कि वह जुर्माना लगा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।

क्या है यूसुफ पठान जमीन विवाद?

यह विवाद गुजरात सरकार के 6 जून, 2024 के उस आदेश से जुड़ा है। जिसमें वडाेदरा नगर निगम (VMC) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था। जिसमें बिना किसी सार्वजनिक नीलामी के पठान को 99 साल की लीज पर 978 वर्ग मीटर का प्लॉट देने की बात कही गई थी। सरकार ने नगर निकाय को यह भी निर्देश दिया था कि वह जल्द से जल्द जमीन से कथित अतिक्रमण को हटाए। पठान की ओर से पेश हुए सीनियर वकील शालिन मेहता ने तर्क दिया कि 25 अक्टूबर, 1999 की एक महत्वपूर्ण सरकारी नीति को सिंगल जज के सामने पेश नहीं किया गया था। मेहता के अनुसार यह नीति कुछ शर्तों के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को प्लॉट अलॉट करने से संबंधित है। यूसुफ पठान ने उन सभी शर्तों को पूरा किया था।

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