श्री पीयूष गोयल

वर्ष 2014 के बाद से, भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इसकी अर्थव्यवस्था कहीं अधिक मजबूत हुई है। बुनियादी ढांचा निश्चित रूप से बेहतर हुआ है। महिलाएं बेहद सशक्त हुईं हैं। किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं और गरीब अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित हुए हैं। इन तमाम बदलावों में एक ही बात साझा है: प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि और उनका नेतृत्व।
भारत के लोगों ने उनके दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व का भरपूर समर्थन किया है और उन्हें देश का सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाला निर्वाचित प्रधानमंत्री बनाया है। बीते 10 जून को उन्होंने राष्ट्र की सेवा में 4,399 दिन पूरे किए और अपनी पहली चुनावी जीत के बाद जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गए।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। देश के लोगों ने ऐसे समय में 2014 में मोदी सरकार को भारी बहुमत से सत्ता सौंपी, जब अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही थी और यूपीए सरकार के बदनाम कार्यकाल के दौरान नीतिगत गतिरोध, भ्रष्टाचार, घोटालों एवं विवादों को लेकर जनता में निराशा लगातार बढ़ रही थी।
संवेदनशील नेतृत्व – 2014 से देश निरंतर बदलाव की यात्रा पर है। मोदी सरकार ने 81 करोड़ से अधिक लोगों के लिए मुफ्त अनाज की व्यवस्था की, 58 करोड़ जन धन बैंक खातों के जरिए वित्तीय समावेशन को संभव बनाया और 16 करोड़ घरों तक नल के पानी का कनेक्शन पहुंचाया। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, ‘आयुष्मान भारत’ के जरिए 12 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की गारंटी मिल रही है।
कई युवा भारतीयों के लिए यह कल्पना करना मुश्किल हो सकता है कि मोदीजी द्वारा – पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री के रूप में – लाए गए बड़े बदलावों से पहले जीवन कितना चुनौतीपूर्ण था। उनके निर्णायक नेतृत्व और नेक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण ने देश को ‘विकसित भारत 2047’ मिशन की दिशा में आगे बढ़ाया है। इस मिशन में भारत की विरासत पर गर्व और विकास का एक महत्वाकांक्षी एजेंडा शामिल है।
नारी शक्ति
प्रधानमंत्री के लिए महिलाएं केवल सहायता की लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माता हैं। सबसे पहले उनकी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान दिया गया: स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए। इससे उनकी सुरक्षा और सम्मान में वृद्धि हुई। वहीं, उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। इससे महिलाओं को धुएं से भरी रसोई के खतरों से मुक्ति मिली।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की पहल ने बेटियों की शिक्षा एवं उनके कल्याण के महत्व को और ठोस बनाया है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए, प्रधानमंत्री ने महिलाओं के नेतृत्व में विकास को आगे बढ़ाने के लिए देश की विधायिकाओं में महिलाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की है।
किसानों का कल्याण
किसानों का कल्याण प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का एक मुख्य आधार रहा है। किसानों के योगदान को मान्यता देते हुए, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के जरिए उन्हें सीधे आय संबंधी सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत बांटे गए कुल 4.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि से लगभग 10 करोड़ किसान परिवारों को लाभ हुआ है।
सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी काफी बढ़ोतरी की है, जो अब उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना है। साथ ही, किफायती दरों पर फसलों के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराकर किसानों को वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी से बचाया गया है।
युवाओं के लिए अवसर
युवा भारतीयों के लिए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी प्रमुख पहलें शुरू की गई हैं। ‘कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय’ के रूप में एक समर्पित मंत्रालय के गठन से जहां युवाओं को आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुकूल कौशल से लैस करने में मदद मिली है, वहीं भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में उभरती हुई क्रांति का लाभ उठाने के लिए तैयार भी किया गया है।
‘स्टार्टअप इंडिया’ और नवाचार को दिए गए व्यापक समर्थन ने कई युवाओं को नौकरी खोजने वाला से हटकर नौकरी देने वाला बनने में मदद की है। इन पहलों ने उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) की एक ऐसी नई लहर की नींव रखी है, जिसमें आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के मामले में अहम योगदान देने की क्षमता है।
अर्थव्यवस्था और जीवनयापन में सुगमता
वर्ष 2014 से पहले, भारत की गिनती दुनिया की “फ्रैजाइल फाइव” (कमजोर पांच) अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में होती थी। निवेशकों का भरोसा भी लगातार कम हो रहा था। साहसिक सुधारों, निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियों, वित्तीय अनुशासन और अपेक्षाकृत कम महंगाई के सहारे, भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है और यह कारोबार व निवेश का एक आकर्षक स्थल बनता जा रहा है।
भारत ने विभिन्न विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इससे हमारे युवाओं, किसानों, छोटे व्यवसायों, कारीगरों और श्रमिकों के लिए वैश्विक स्तर पर नए अवसर खुले हैं। और ऐसा भारत के हितों से समझौता किए बिना किया गया है। यह यूपीए सरकार द्वारा किए गए कुछ लापरवाही भरे समझौतों से बिल्कुल अलग है।
सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और करों की कम दरों जैसे बड़े सुधारों के जरिए कारोबार जगत और मध्यम वर्ग का भरोसा भी बढ़ाया है। इंटरनेट की पैठ और डिजिटल भुगतान प्रणाली के तेज विस्तार के साथ मिलकर, ‘डिजिटल इंडिया’ पहल ने अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालने के साथ-साथ नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को भी आसान बनाया है।
कई पुराने एवं मामूली अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने तथा अनुपालन के अनावश्यक बोझ को कम करने से कारोबार जगत को और भी अधिक लाभ हुआ है। मध्यम वर्ग को भी काफ़ी राहत मिली है और 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय को आयकर से छूट दे दी गई है।
आधुनिक बुनियादी ढांचा
मोदी सरकार देश के बुनियादी ढांचे में तेजी से बदलाव ला रही है। सक्रिय हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 में सक्रिय हवाई अड्डों की संख्या 74 थी और अब यह 160 से अधिक हो गई है।
बड़े पैमाने पर रेलवे के विद्युतीकरण, महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्गों व एक्सप्रेसवे के तेज विस्तार ने देश के कई हिस्सों के बुनियादी ढांचे को दुनिया के बेहतरीन बुनियादी ढांचों की बराबरी में ला खड़ा किया है।
प्रधानमंत्री की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का वास्तविक महत्व कार्यकाल के दिनों की गिनती में नहीं, बल्कि किए गए व्यापक बदलावों में निहित है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने गरीबों एवं किसानों के कल्याण, मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं और उभरते भारत की महत्वाकांक्षाओं को शासन के केन्द्र में रखा है।
अब जबकि देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है, 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के नए संकल्प के साथ बदलाव की यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी।

(लेखक केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं)

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