तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बुधवार को बड़ा झटका लगा जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और संसद दोनों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। इसी बीच सुष्मिता देव ने टीएमसी छोड़ने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यह साफ किया है कि पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और असम में पार्टी की कमजोर स्थिति ने उन्हें यह महसूस कराया कि टीएमसी में उनका कोई भविष्य नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक आधार असम है और वहां पार्टी की दिशा स्पष्ट नहीं दिख रही थी, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है। साथ ही सुष्मिता ने बीजेपी द्वारा नेताओं पर दबाव बनाने के आरोपों को भी पूरी तरह से खारिज किया है।
असम में टीएमसी की राजनीतिक संभावनाएं बेहद सीमित – सुष्मिता
हिंदूस्तान टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू के दौरान सुष्मिता देव ने कहा कि असम और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों के जनादेश को देखने के बाद उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि असम में टीएमसी की राजनीतिक संभावनाएं बेहद सीमित हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव हारना या जीतना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन 4 मई के बाद जो हालात बने, उससे उन्हें लगा कि पार्टी में उनके लिए भविष्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में असम टीएमसी की प्राथमिकताओं में कहीं दिखाई नहीं देता। सुष्मिता ने पार्टी के भीतर पूरी तरह भ्रम की स्थिति होने की बात कही और संकेत दिया कि आने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भी संगठन स्पष्ट दिशा में नहीं बढ़ रहा है।
अभिषेक बनर्जी को लेकर नहीं दी कोई टिप्पणी
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर पूछे गए सवाल पर सुष्मिता देव ने कहा कि उनका संपर्क केवल असम तक सीमित था और वह बंगाल की अंदरूनी राजनीति से जुड़ी नहीं थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव में लगभग कोई प्रचार नहीं किया, सिर्फ एक दिन ममता बनर्जी के साथ पदयात्रा में शामिल हुई थी। इसलिए वह यह नहीं बता सकतीं कि पार्टी के भीतर किस वजह से असंतोष बढ़ा। ममता बनर्जी के नेतृत्व और बंगाल की मौजूदा स्थिति पर भी उन्होंने कहा कि वह वहां की राजनीति से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं थी, इसलिए किसी आंतरिक विवाद पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि बंगाल की घटनाओं ने उनके फैसले को प्रभावित किया है।
बीजेपी के दबाव बनाने के आरोपों को खारिज किया
बीजेपी द्वारा केस का डर दिखा कर टीएमसी नेताओं पर दबाव बनाने के आरोपों को सुष्मिता देव ने पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी तरह की धमकी नहीं मिली और उनके खिलाफ कोई मामला भी नहीं है। सुष्मिता ने बताया कि उन्होंने सुबह लगभग 10:15 बजे टीएमसी से इस्तीफा भेजा और उसके तुरंत बाद उपराष्ट्रपति को राज्यसभा से इस्तीफा सौंप दिया। फिर वह खुले तौर पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के घर गईं और उनसे असम की राजनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि असम की राजनीति को समझने के लिए हिमंत सरमा से बेहतर व्यक्ति कोई नहीं है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आगे उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी।


