Shukra Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. यह व्रत देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की आराधना के लिए समर्पित होता है. इस वर्ष लगभग तीन वर्षों बाद अधिकमास में पड़ने वाला शुक्र प्रदोष व्रत शुक्रवार, 12 जून 2026 को मनाया जाएगा. अधिकमास में आने के कारण यह व्रत अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है.

सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहा है व्रत को खास

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार प्रदोष व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ गया है. पंचांग के अनुसार, यह शुभ योग सुबह 5:23 बजे से सुबह 6:28 बजे तक रहेगा. मान्यता है कि इस योग में भगवान शिव की उपासना करने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.

शिवालयों में होगी विशेष पूजा-अर्चना

शुक्र प्रदोष के अवसर पर दक्षिण मुंबई के गिरगांव स्थित प्राचीन बाबुलनाथ मंदिर सहित देशभर के शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष शिवोपासना की जाएगी. श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करेंगे तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे.

जानें प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्र के अनुसार, जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है, उसी वार के अनुसार प्रदोष व्रत का नाम निर्धारित होता है. शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून को शाम 7:36 बजे से प्रारंभ होकर 13 जून को शाम 4:07 बजे तक रहेगी. प्रदोष काल में शिव पूजा का शुभ समय शाम 7:36 बजे से रात 9:20 बजे तक रहेगा. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से 12:49 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:40 बजे से 3:36 बजे तक तथा गोधूलि मुहूर्त शाम 7:18 बजे से 7:38 बजे तक रहेगा.

अधिकमास का प्रदोष व्रत क्यों है विशेष?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास में किए गए व्रत, दान और पूजा-पाठ का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है. ऐसे में अधिकमास में पड़ने वाला शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है.

(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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