एवियन-ले-बैंस (फ्रांस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) मंगलवार को फ्रांस के खूबसूरत शहर Évian-les-Bains पहुंच गए, जहां वह 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक आयोजित किया जा रहा है और इसमें दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) के विशेष निमंत्रण पर पहुंचे मोदी का सम्मेलन स्थल पर औपचारिक स्वागत किया जाएगा। जी7 देशों के अलावा भारत सहित कई साझेदार देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी इसमें भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन में  राष्ट्रपति.डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भी पहुंच चुके हैं। दुनिया की निगाहें अब मोदी और ट्रंप के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हैं, जिसे सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद यह उनका पहला बड़ा बहुपक्षीय मंच है, जहां वह दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की मुलाकात को लेकर कूटनीतिक हलकों में काफी उत्सुकता है, क्योंकि दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, वीजा नीति, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

ट्रंप से मुलाकात पर सबसे ज्यादा नजर
फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह विश्व नेताओं के साथ अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक अधिक टिकाऊ, समृद्ध और समावेशी विश्व व्यवस्था के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस सम्मेलन का सबसे चर्चित पहलू प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक है। दोनों नेताओं की यह करीब 16 महीनों में पहली आमने-सामने मुलाकात होगी। माना जा रहा है कि दोनों नेता व्यापार, वीजा, ऊर्जा सहयोग, रक्षा, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा कर सकते हैं।

इन मुद्दों पर होगा वैश्विक मंथन
जी7 सम्मेलन में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा होनी है, उनमें शामिल हैं 

  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
  • पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका-ईरान समझौता
  • रूस-यूक्रेन युद्ध
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का नियमन
  • महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति
  • ऊर्जा सुरक्षा
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती
  • सतत विकास और जलवायु चुनौतियां

अन्य नेताओं से भी मुलाकात
जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान  के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें प्रस्तावित हैं। गौरतलब है कि जब दुनिया यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा सुरक्षा और एआई शासन जैसे मुद्दों से जूझ रही है, भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। जी7 मंच पर मोदी की मौजूदगी भारत की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक ताकत का भी संकेत मानी जा रही है।

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