ब्रिटेन की राजनीति एक बार फिर अस्थिरता के दौर में पहुंच गई है। यूनाइटेड किंगडम (UK) के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सोमवार को लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। इससे ब्रिटेन में पिछले एक दशक के भीतर कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ने वाले प्रधानमंत्रियों की संख्या सात तक पहुंच गई है। स्टारमर का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उनकी पार्टी को हालिया स्थानीय चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ा और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा था। अब लेबर पार्टी में नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

संसदीय पार्टी की राय सुनकर इस्तीफा दिया – स्टारमर

कीर स्टारमर ने लंदन स्थित 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर भावुक संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री बनना उनके जीवन का सबसे गर्व का क्षण था। उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व में ब्रिटेन की वैश्विक छवि मजबूत हुई, निवेश बढ़ा और श्रमिक अधिकारों में सुधार हुआ। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी के सांसद लगातार यह सवाल उठा रहे थे कि क्या वह अगले आम चुनाव तक पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हैं। स्टारमर ने कहा कि मैंने अपनी संसदीय पार्टी की राय सुन ली है और मैं सम्मानपूर्वक लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देता हूं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नया नेता चुने जाने तक वह प्रधानमंत्री बने रहेंगे ताकि सत्ता हस्तांतरण व्यवस्थित तरीके से हो सके।

ब्रेक्जिट के बाद लगातार बदले ब्रिटेन के पीएम

ब्रिटेन में 2016 के ब्रेक्जिट जनमत संग्रह के बाद से राजनीतिक अस्थिरता लगातार बनी हुई है। डेविड कैमरन ने यूरोपीय संघ में बने रहने का समर्थन किया था, लेकिन जनमत संग्रह हारने के बाद इस्तीफा दे दिया। उनके बाद थेरेसा मे प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन यूरोपीय संघ (EU) के साथ नए संबंध तय करने में असफल रहने पर पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद बोरिस जॉनसन सत्ता में आए, लेकिन पार्टी विवाद और मंत्रियों के इस्तीफों के दबाव में उन्हें भी हटना पड़ा। जॉनसन के बाद लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनीं, मगर उनका मिनी बजट आर्थिक संकट का कारण बना और सिर्फ 50 दिनों में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। फिर ऋषि सुनक ने महंगाई और यूक्रेन युद्ध से पैदा आर्थिक संकट के बीच सरकार संभाली।

भारी बहुमत के बावजूद नहीं बचा सके सरकार

कीर स्टारमर ने 2024 के आम चुनाव में ऋषि सुनक को हराकर लेबर पार्टी को 14 साल बाद सत्ता में वापसी दिलाई थी। पार्टी को संसद में 174 सीटों का विशाल बहुमत मिला था, जिसे ऐतिहासिक जीत माना गया। हालांकि सरकार बनने के बाद महंगाई, जीवनयापन लागत और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर जनता की नाराजगी बढ़ती गई। पार्टी के भीतर भी लगातार मतभेद सामने आने लगे। हाल ही में मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहम की जीत ने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा को और तेज कर दिया। माना जा रहा है कि वह लेबर पार्टी के अगले बड़े दावेदार बन सकते हैं।

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