भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसे पिछले महीने नीट परीक्षा लीक होने के बाद एक नागरिक प्रतियोगी परीक्षा आयोजित करने में मदद के लिए अपनी वायु सेना को शामिल करने का अविश्वसनीय गौरव प्राप्त है। साथ ही, यह एकमात्र ऐसा देश है जहां प्रश्न पत्रों के लीक होने और फैलने से रोकने के लिए एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, नवीनतम मामले में टैलीग्राम, को ब्लॉक कर दिया गया!

ये उपाय विचित्र लगते हैं लेकिन स्पष्ट रूप से प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली के पूरी तरह से ध्वस्त होने और ऐसी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने में नागरिक अधिकारियों की लाचारी को दर्शाते हैं। लेकिन जो वास्तव में दिल तोडऩे वाला है, वह यह कि प्रश्न पत्रों के लीक होने से रोकने में अधिकारियों की विफलता के परिणामस्वरूप एक दर्जन से अधिक युवा नागरिकों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि लाखों अन्य आघात से जूझ रहे हैं। उनमें से अधिकांश किशोर हैं या अभी वयस्क जीवन में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कड़ी मेहनत की थी और बेहतर जीवन की तलाश में थे लेकिन प्रणाली की अक्षमता ने निश्चित रूप से उनके मानस पर गहरा घाव छोड़ दिया होगा। हालांकि अपनी जान लेना या ऐसा करने का प्रयास करना बिल्कुल भी उचित नहीं और यह कोई समाधान नहीं है लेकिन देश भर की घटनाएं प्रश्न पत्र लीक होने के नवीनतम मामले के दर्दनाक प्रभाव को दर्शाती हैं। कल्पना करें कि युवा छात्र परीक्षाएं पास करने के लिए रात-दिन एक कर रहे हैं और फिर खबर आती है कि कुछ बेईमान लोगों ने पैसे का लेन-देन करके उन्हें इस अवसर से वंचित कर दिया है।

दुर्भाग्य से, ऐसा पहली बार नहीं हुआ। नैशनल टैसिं्टग एजैंसी (एन.टी.ए.) का रिकॉर्ड, 2018 में अपनी स्थापना के बाद से ही संदिग्ध रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में गड़बडिय़ों या खुलेआम लीक होने के अनगिनत उदाहरण रहे हैं। जबकि 2019 और 2020 में, एन.टी.ए. ने बिना किसी शिकायत के नीट, जे.ई.ई. (मेन्स) और यू.जी.सी.-नेट का संचालन किया, लेकिन 2021 में जयपुर में नीट पेपर लीक के सोशल मीडिया दावों के बाद एक एफ.आई.आर. दर्ज की गई। गिरफ्तारियां की गईं और एक आरोपी से नकदी बरामद की गई लेकिन एन.टी.ए. ने किसी भी लीक से इंकार किया और कोई राष्ट्रव्यापी री-टैस्ट का आदेश नहीं दिया गया। उस वर्ष, सोनीपत केंद्र पर परीक्षा कम्प्यूटरों को हैक करने और 12-15 लाख रुपए देने वाले उम्मीदवारों के लिए पेपर हल करने के कथित मामले में एफिनिटी एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज होने के बाद जे.ई.ई. (मेन्स) को भी जांच का सामना करना पड़ा।

सी.बी.आई. ने 20 स्थानों पर छापेमारी की। यू.जी.सी-नेट 2021 ने विवादित सोशल मीडिया आरोपों को जन्म दिया, जिसे एन.टी.ए. ने खारिज कर दिया और कोई लीक साबित नहीं हुआ। नीट 2022 में कुछ केंद्रों पर कदाचार के अलग-थलग आरोप देखे गए लेकिन पेपर लीक की कोई पुष्टि नहीं हुई। यू.जी.सी.-नेट 2022 ने छात्र समूहों एस.एफ.आई. और आइसा द्वारा दावों को प्रेरित किया कि इतिहास का पेपर लीक हो गया था। एन.टी.ए. ने फिर से इसे खारिज कर दिया, यह देखते हुए कि प्रसारित पेपर का प्रारूप वास्तविक परीक्षा से मेल नहीं खाता था।

नीट-यू.जी. 2024 में एक बड़ा विवाद तब पैदा हुआ जब कथित तौर पर हजारीबाग के एक स्ट्रांग रूम में एन.टी.ए. ट्रंक से प्रश्न पत्र की तस्वीरें ली गईं और परीक्षा से 24 घंटे पहले लगभग 30 लाख रुपए में बेची गईं। यह मुद्दा तब सामने आया जब 67 उम्मीदवारों ने 720 का परफैक्ट स्कोर प्राप्त किया। सी.बी.आई. ने 45 आरोपियों के खिलाफ 5 चार्जशीट दायर कीं। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण री-टैस्ट से इंकार कर दिया और 1,563 उम्मीदवारों (813 उपस्थित हुए) के लिए एक सीमित री-एग्जाम आयोजित किया गया। डार्क वैब पर प्रश्न सामने आने के आरोपों के बीच यू.जी.सी. नेट 2024 को रद्द कर दिया गया। सी.यू.ई.टी. पी.जी. 2024 को भी आरोपों का सामना करना पड़ा। 2025 में, सी.एस.आई.आर.-यू.जी.सी. नेट में हरियाणा में प्रश्न-पत्र लीक के आरोप सामने आए।

शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल पर संसदीय स्थायी समिति ने पिछले साल संसद में सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में उन समस्याओं को चिह्नित किया था, जिन्हें वह एन.टी.ए. की समस्याएं मानती थी। इसने उल्लेख किया, ‘समिति के ध्यान में लाया गया है कि केवल वर्ष 2024 में, एन.टी.ए. द्वारा आयोजित 14 प्रतियोगी परीक्षाओं में से, कम से कम 5 ने बड़ी समस्याओं का सामना किया और परिणामस्वरूप, 3 परीक्षाओं यानी यू.जी.सी.-नेट,  सी.एस.आई.आर.-नेट और नीट-पी.जी. को स्थगित करना पड़ा, एक परीक्षा यानी नीट-यू.जी. में पेपर लीक के उदाहरण देखे गए और एक परीक्षा यानी सी.यू.ई.टी. (यू.जी./पी.जी.) के परिणाम स्थगित कर दिए गए।’

पैनल ने कहा, ‘जनवरी 2025 में आयोजित जे.ई.ई. मेन 2025 में, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी में देखी गई त्रुटियों के कारण कम से कम 12 प्रश्नों को हटाना पड़ा। समिति ने देखा कि ऐसे उदाहरण प्रणाली में परीक्षाॢथयों का भरोसा नहीं जगाते। इसलिए समिति सिफारिश करती है कि एन.टी.ए. को जल्दी से अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे उदाहरण न हों।’ लीक को लेकर नवगठित कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संपर्क ने युवाओं के बीच हताशा और गुस्से को दर्शाया है। वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सरकार की प्रतिक्रिया मौन और यहां तक कि अडिय़ल रही है। उसे इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए और देश के युवाओं तक पहुंचना चाहिए। शायद सबसे कम जो वह कर सकती है, वह है उस मंत्री को बर्खास्त करना, जिसे प्रश्न पत्रों के लीक होने को रोकने में अपनी पूरी विफलता के लिए स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए था।-विपिन पब्बी

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