चंडीगढ़ : हरियाणा के बहुचर्चित आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक और ए.यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े 661 करोड़ों रुपए के कथित वित्तीय घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। सूत्रों अनुसार गत दिनों 5 आई.ए.एस. अफसरों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। 2 दिन पहले एक अन्य वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए समय मांगा लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से उन्हें समय नहीं दिया गया। वहीं अब सी.बी.आई. की जांच का फोकस उन दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों पर है जिनसे अधिकारियों और बैंकिंग नैटवर्क के बीच कथित संपकों की कड़ियां जुड़ रही हैं।
सी.बी.आई. के हाथ लगी डायरी, 6 अफसरों के नाम होने की चर्चा
सूत्रों का दावा है कि सी. बी.आई. के पास एक ऐसी डायरी और दस्तावेज पहुंचे हैं जिनमें 6 अधिकारियों के नाम हैं। बताया जा रहा है कि यह दस्तावेज उस समय तैयार किए गए थे जब मामले में ए.सी.बी. कार्रवाई से पहले आंतरिक स्तर पर जांच चल रही थी। सूत्रों अनुसार एक कागज पर कथित रूप से धन के लेन-देन और भुगतान से संबंधित विवरण दर्ज किए गए थे। इसी दौरान नरेश नामक व्यक्ति को कथित तौर पर रकम निकलवाने और आगे पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच एजैंसियों के सूत्रों का दावा है कि संबंधित दस्तावेजों और डायरी को छिपाने का प्रयास भी किया गया था। हालांकि बाद में एंटी करप्शन ब्यूरो की छापेमारी दौरान यह सामग्री बरामद हो गई थी।
सूत्रों के मुताबिक जब मामले की जानकारी सार्वजनिक होने लगी तो कथित तौर पर 6 अधिकारियों की एक गोपनीय बैठक भी हुई थी। बैठक में आगे की रणनीति और जांच के संभावित असर पर चर्चा किए जाने की बात सामने आ रही है। इतना ही नहीं अफसरों की ओर से शुरूआती चरण में जांच को दबाने और उसकी दिशा बदलने का प्रयास किया गया। दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री स्तर पर ए.सी.बी. जांच की बात होने के बावजूद मामल की पहल क्राइम ब्रांच की ओर मोड़ दिया गया था। बाद में फाइल दोबारा ए.सी.बी. के पास पहुंची और जांच आगे बढ़ी।
डिलीट चैट भी सी.बी.आई. ने की रिकवर
सूत्रों अनुसार बैंक अधिकारियों और कुछ अन्य लोगों के बीच हुई चैट जांच एजेंसियों को मिल गई थी। इसके बाद जिन अधिकारियों से पूछताछ की गई उन्होंने अपने मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड से कुछ डाटा डिलीट कर दिया था। हालांकि सी.बी.आई. की तकनीकी टीम ने डिलीट डाटा और चैट रिकॉर्ड को रिकवर कर लिया है। अब इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जांच दौरान नरेश और विक्रम बधवा का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि दोनों कथित तौर पर अधिकारियों और अन्य पक्षों के बीच बिचौलियों की भूमिका निभाते थे।
आई.ए.एस. पंकज अग्रवाल से रिमांड में मिले कई सबूत, 14 दिन के लिए भेजा जेल
661 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में गिरफ्तार हुए वरिष्ठ आई ए.एस अधिकारी पंकज अग्रवाल को 2 दिन के रिमांड के बादवीरवार को पंचकूला कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में अंबाला जेल भेज दिया है। सूत्रों की मानें तो 2 दिन के रिमांड दौरान सीबीआई ने पंकज अग्रवाल के खिलाफ मिले सबूतों और साक्ष्यों का मिलान किया है।
पंकज अवावाल पर स्कूल शिक्षा विभाग और कृषि विभाग में प्रधान सचिव के पद पर तैनात रहने दौरान वित्तीय अनियमितता करने का आरोप है। जांच एजेंसी अनुसार मामला हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल माकर्कीटिंग बोर्ड के उन बैंक खातों से जुड़ा है जो चंडीगढ़ के सैक्टर-32 स्थित आई डी. एफ.सी. शाखा में खोले गए थे। आरोप है कि इन खातों के जरिए सरकारी धन की हेराफेरी की गई और सरकार को 60.54 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

