नई दिल्ली: देश में एक और राज्य ने समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code की ओर कदम बढ़ा दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने की कवायद शुरु कर दी है। इसके लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति देश में अन्य राज्यों द्वारा लागू समान नागरिक संहिता के साथ साथ विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन कर सुझाव देगी। साथ ही इस में जन भागीदारी के लिए व्यापक जनपरामर्श के बाद राज्य सरकार को मसौदा एवं विधायी सिफारिशें की जाने की बात सामने आ रही है।

समान नागरिक संहिता क्या है

समान नागरिक संहिता का मतलब है, देश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग की परवाह किए बिना पूरे देश में एक जैसा कानून होना। फिलहाल क्या है कि अलग-अलग धर्मों के कुछ कानून जैसे हिंदू मैरिज एक्ट या मुस्लिम पर्सनल कानून भी लागू होते हैं, जबकि यूसीसी लागू होने पर शादी, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे के लिए सभी नागरिकों हेतु एक ही कानून होगा। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य है कि देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार देना और साथ ही लैंगिक न्याय महिला-पुरुष समानता सुनिश्चित किया जाना।

समान नागरिक संहिता और छत्तीसगढ़ सरकार की कोशिश

छत्तीसगढ़ सरकार ने भी समान नागरिक संहिता Uniform Civil Code लागू करने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ा दिया है। सरकार ने 5 सदस्यों वाली उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। राज्य सरकार के अनुसार, समान नागरिक संहिता से न्यायिक प्रक्रियाएं सरल होंगी तथा धार्मिक और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यालय ने समिति गठन की अधिसूचना जारी की। इससे पहले अप्रैल 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने ऐसी समिति गठित करने का निर्णय लिया था।

राज्य यानी भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता Uniform Civil Code लागू करने का प्रयास करेगा। इसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग से निरपेक्ष होकर विवाह, तलाक और विरासत जैसे मामलों में एक समान कानून बनाना है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार

संविधान के अनुच्छेद 44 में क्या है

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति-निर्देशक तत्वों का उल्लेख है। इसी के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिश करने की सलाह दी गई है। वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषय अलग-अलग धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों के अधीन संचालित होते हैं। सरकार का मानना है कि अनेक व्यक्तिगत कानूनों के कारण देश में न्यायिक प्रक्रियाएं और जटिल हो जाती है और समानता प्रभावित होती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के प्रस्तावित यूसीसी का उद्देश्य भी नागरिक मामलों में एक समान कानूनी ढांचा उपलब्ध कराना है।

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कौन है

दरअसल न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई Justice Ranjana Prakash Desai इससे पहले उत्तराखंड की यूसीसी मसौदा समिति का भी नेतृत्व कर चुकी हैं। उनके अनुभव को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें इस समिति का अध्यक्ष बनाया है। न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश भी रही हैें। इसके अलावा, वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की पहली महिला अध्यक्ष भी रही हैं।

पूरी प्रक्रिया का पारदर्शी और समावेशी रहना जरूरी

दरअसल छत्तीसगढ़ में इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि समिति कितनी व्यापक सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करती है और संविधान सिद्धांतों के बीच संतुलित कानूनी ढांचा तैयार कर पाती है। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए समिति का गठन राज्य की विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी रही, तो इसका प्रभाव राज्य ही नहीं, बल्कि बड़े फलक यानी राष्ट्रीय स्तर पर भी दीख सकता है।

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