तलाक और पारिवारिक विवादों में एक-दूसरे को बदनाम करने के लिए निजी तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने साफ कहा कि वैवाहिक विवाद बदले और बेइज्जती का अखाड़ा नहीं बन सकते. 

मामला 2022 में हुई शादी से जुड़ा है. शादी के एक साल बाद पत्नी ने पति और उसके परिवार पर घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया. इसके जवाब में पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की और उसमें पत्नी की बेहद निजी तस्वीरें भी लगा दीं.

पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी निजता के अधिकार के उल्लंघन की शिकायत की. उसने 2015 के हाईकोर्ट आदेश का हवाला देते हुए कहा कि निजी सामग्री पेश करने से पहले फैमिली कोर्ट की अनुमति जरूरी है. 

कोर्ट ने कहा- यह गंभीर चूक

जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने कहा कि पत्नी की निजी तस्वीरों को कोर्ट रिकॉर्ड का हिस्सा बनाना बेहद गंभीर चूक है. अदालत ने साफ किया कि मुकदमा जीतने के नाम पर किसी की गरिमा और निजता को ठेस नहीं पहुंचाया जा सकता.

दोनों पक्षों को चेतावनी

कोर्ट ने नोट किया कि पत्नी ने भी जवाब में पति की आपत्तिजनक सामग्री रखी थी, लेकिन दोनों की गंभीरता अलग-अलग है. हाईकोर्ट ने वकीलों को भी फटकार लगाई और कहा कि मुवक्किल का केस जीतने के चक्कर में विपक्ष की गरिमा कुचलने की इजाजत किसी को नहीं है.

फैमिली कोर्ट को दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने पति और वकीलों को पत्नी की तस्वीरें आगे साझा करने से रोक दिया. फैमिली कोर्ट को निर्देश दिए गए कि इन तस्वीरों को रिकॉर्ड से हटाकर सीलबंद लिफाफे में रखा जाए. महिला की पहचान छिपाई जाए और अनावश्यक पहुंच रोकी जाए.

यह फैसला तलाक के मामलों में निजी सामग्री के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में अहम माना जा रहा है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालतें गरिमा और निजता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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