दार्जिलिंग: लोअर भुटिया इलाके के देवकोटा गांव में 52 वर्षीय देविका शेरपा अपने आठ साल के पोते और पालतू कुत्ते की जान बचाने के लिए तेंदुए से अकेले ही भिड़ गई। शाम करीब 6 बजे देविका पूजा करके घर लौटी थीं। रात का खाना खाने के बाद उन्होंने घर के बाहर कुछ हलचल महसूस की। जैसे ही वह बाहर निकलीं, उनका छोटा पोता भी पीछे-पीछे आ गया। बाहर का दृश्य देखकर देविका के होश उड़ गए। एक खूंखार तेंदुआ उनके पालतू कुत्ते पर हमला कर चुका था।
तेंदुए से भिड़ गई देविका
उस पल देविका के सामने दो रास्ते थे। या तो वो डरकर पीछे हट जाती या अपने परिवार को बचाने के लिए मौत से भिड़ जाती। उन्होंने बिना एक पल गंवाए तेंदुए पर हमला बोल दिया। करीब एक घंटे तक वह तेंदुए से लड़ती रहीं। इस दौरान उनके सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। देविका का कहना है कि उन्हें सबसे ज्यादा डर इस बात का था कि कहीं तेंदुआ उनके पोते को नुकसान न पहुंचा दे। यही सोच उन्हें लड़ने की ताकत देती रही। आखिरकार शोर-शराबा सुनकर गांव के लोग पहुंचे और तेंदुआ वहां से भाग निकला।
देविका को अस्पताल में करवाया गया भर्ती
तेंदुए के हमले में देविका को काफी चोटें आई। घरवालों ने घायल देविका को तुरंत दार्जिलिंग जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। देविका के हाथ की सर्जरी हुई और स्टील की प्लेटें लगाई गईं। दर्द और चोटों के बावजूद उनके चेहरे पर इस बात की संतुष्टि है कि उन्होंने अपने पोते और पालतू साथी की जान बचा ली। देविका शेरपा की बहादुरी के चर्चे अब पूरे इलाके में हैं।
वन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे
लोग उनकी इस बहादुरी के लिए उनकी तारीफ करते हुए नहीं थक रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि देविका ने जो किया वो हर किसी के बस की बात नहीं। लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी तेंदुए ने इस इलाके से मवेशी या पालतू जानवर उठाए हैं। वहीं घटना के तुरंत बाद वन विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे। वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, इस घटना के बाद तेंदुआ बहुत आक्रामक हो गया है, जिससे फिलहाल उसे पकड़ना मुश्किल हो गया है।

