फ्लैट खरीदते वक्त बहुत सावधानी बरतनी चाहिए. बिल्डरों के दावों की खुद से जांच करनी चाहिए. सैंपल फ्लैट और आपको मिलने वाले असली फ्लैट में काफी अंतर हो सकता है. घर खरीदते वक्त बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए. आप जब कोई फ्लैट देखने जाएं तो बिल्डर के दावों पर ही भरोसा न कर लें बल्कि खुद हर चीज को जांच परख लें.आप जब कोई फ्लैट देखने जाते हैं तो बिल्डर आपको सैंपल फ्लैट दिखाता है लेकिन सिर्फ इसे देखकर ही कोई फैसला न लें. दरअसल सैंपल फ्लैट और आपको मिलने जा रहे फ्लैट में काफी कुछ अलग हो सकता है. बिल्डर खरीदारों को लुभाने कई ट्रिक्स अपनाते हैं जिनकी जानकारी होना जरूरी है. सैंपल फ्लैट में कमरों के बीच दरवाजे नहीं होते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि फ्लैट में ज्यादा जगह होने का एहसास हो. टॉयलेट और बाथरूम को भी बिना दरवाजों के रखा जाता है.
सैंपल फ्लैट में दीवारों पर सबसे पहले ध्यान जाता है जो कि काफी फिनिशिंग वाली होती है लेकिन ये दीवारें ईंट और प्लास्टर के बजाय जिप्सप के बोर्ड की बनी होती हैं. सैंपल फ्लैट की दीवारों का पतला भी रखा जाता है ताकि फ्लैट बड़ा दिखाई दे. असली फ्लैट के मुकाबले सैंपल फ्लैट में सीलिंग ऊंची रखी जा सकती है. सैंपल फ्लैट में ग्लास की दीवारों का इस्तेमाल भी किया जाता है. इसका कारण भी यही होता है कि जगह ज्यादा होने का आभास लोगों को हो. सैंपल फ्लैट के इंटीरियर, शानदार फर्नीचर साज-समान पर न जाएं यह बहुत ध्यान से तैयार कराया जाता है ताकि खरीदार को लुभाया जा सके. सैंपल फ्लैट में सभी खिड़कियों और बालकनी को अच्छे नजारों की तरफ खोला जाता है. जबकि असली फ्लैट शायद दो या तीन साइड से खुला न हो.
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