मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का का काम अब बेहद तेज गति से आगे बढ़ रहा है। गुजरात के हिस्से में बुलेट ट्रेन का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इस सब के बीच मुंबई से बड़ा अपडेट सामने आया है। यहां पर विक्रोली में बुलेट ट्रेन की खुदाई का काम शुरू कर दिया गया है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की सुरंग के निर्माण के लिए भारत की सबसे बड़ी रेल टनल बोरिंग मशीन इस्तेमाल की जा रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुजरात में 15 अगस्त 2027 को बुलेट ट्रेन चलाने का वादा किया है।

बन चुकी है पांच किलोमीटर सुरंग

मुंबई में बन रही कुल 21 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड टनल सेक्शन में से सावली (घंसोली) और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के बीच 16 किलोमीटर का हिस्सा टनल बोरिंग मशीन द्वारा बनाया जाएगा। बाकी 5 किलोमीटर का हिस्सा एनएटीएम का इस्तेमाल करके पहले ही पूरा किया जा चुका है। NHSRCL ने बताया है कि विक्रोली से लॉन्च की गई टीबीएम 6 किमी लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग की खुदाई करेगी, जिसे बुलेट ट्रेन के अप और डाउन दोनों ट्रैकों को समायोजित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह मशीन बहुमंजिला इमारतों, सड़कों, मीठी नदी और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे सहित घने शहरी क्षेत्रों के नीचे से गुजरेगी।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की बड़ी बातें

  • मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है। यह जापान की ‘शिंकानसेन’ तकनीक पर आधारित है।
  • मुंबई-अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबे इस रूट पर ट्रेन 320 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी।
  • मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के संचालन से दोनों शहरों के बीच का 6-7 घंटे का सफर मात्र 2 घंटे और 7 मिनट में पूरा होगा।
  • बुलेट ट्रेन की अधिकतम डिज़ाइन गति 350 किलोमीटर/घंटा होगी, लेकिन इसका परिचालन 320 किलोमीटर/घंटा की रफ्तार से किया जाएगा।
  • बुलेट ट्रेन के पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशन हैं। इनमें महाराष्ट्र में मुंबई (BKC), ठाणे, विरार, बोईसर है। जब गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद, साबरमती हैं।
  • सबसे बड़ी टीबीएम मशीन का इस्तेमाल
  • बुलेट ट्रेन की सुरंग को बनाने में सबसे बड़ी टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें 13.6 मीटर व्यास (4 मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर) वाला एक बहुत बड़ा कटरहेड है। इसका वजन 3,100 टन है। जो कि 500 एशियाई हाथियों के बराबर है। इसकी कुल लंबाई 96 मीटर (एक फुटबॉल मैदान की लंबाई (105 मीटर) के बराबर) है। मशीन में कटर व्हील/हेड, मेन बियरिंग, जॉ क्रशर, इरेक्टर, मेन शील्ड, टेल शील्ड और चार विशेष गैन्ट्री सहित कई प्रमुख घटक शामिल हैं जो सुरंग संचालन में मदद करते हैं। कटर व्हील 4 RPM (रेवोल्यूशन प्रति मिनट), यानी 4 चक्कर प्रति मिनट की गति से घूमता है। उपयोग में लाई जा रही मशीन मिक्सशील्ड टीबीएम है, जो एक उन्नत स्लरी-प्रकार की टनलिंग प्रणाली है जिसे विशेष रूप से मिश्रित भूभाग और उच्च भूजल दबाव की स्थितियों में बड़े व्यास की सुरंगों की खुदाई के लिए डिजाइन किया गया है।
  • सुरंग में लगेंगे 77,000 कंक्रीट रिंग
  • ठाणे जिले के महापे में 11.17 हेक्टेयर में फैला एक खास कास्टिंग यार्ड में 16 किलोमीटर लंबे टीबीएम सेक्शन के लिए टनल लाइनिंग सेगमेंट बनाने का काम पहले से ही कर रहा है।कुल 77,000 कंक्रीट सेगमेंट ढाले जा रहे हैं ताकि 7,700 टनल रिंग्स बनाई जा सकें। प्रत्येक रिंग में नौ मुड़े हुए सेगमेंट और एक मुख्य सेगमेंट होता है। प्रत्येक सेगमेंट 2 मीटर चौड़ा और 500 मिमी मोटा है, जबकि एक पूरी टनल रिंग का वजन लगभग 100 टन है। टीबीएम का इस्तेमाल करके खोदे गए टनल सेक्शन को पूरी तरह से वॉटरप्रूफ स्ट्रक्चर के तौर पर डिजाइन किया जा रहा है। स्ट्रक्चर की परफॉर्मेंस, भूमिगत जल के व्यवहार और कुल निर्माण सुरक्षा की लगातार रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए सिस्टम भी लगाए गए हैं। पानी के रिसाव को रोकने के लिए, सुरंग की लाइनिंग पर डबल-लेयर एथिलीन प्रोपिलीन डिएन मोनोमर (ईपीडीएम) गास्केट्स का उपयोग किया गया है। जिन्हें हाइड्रोफिलिक सील्स के साथ जोड़ा गया है, ताकि लंबी अवधि तक संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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