हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक गरुड़ पुराण जीवन और मृत्यु के रहस्यों पर विस्तार से चर्चा करता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने गरुड़ देव को जीवन, कर्म और मृत्यु से जुड़े कई गूढ़ रहस्य बताए थे, जिन्हें बाद में गरुड़ पुराण के रूप में संकलित किया गया. इस ग्रंथ में केवल मृत्यु के बाद की यात्रा का ही वर्णन नहीं मिलता, बल्कि ऐसे कुछ संकेतों का भी उल्लेख है, जो किसी व्यक्ति के जीवन के अंतिम समय से पहले दिखाई देने की बात कही गई है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ये बातें धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इन्हें वैज्ञानिक तथ्य या भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

1. इंद्रियों का धीरे-धीरे कमजोर होना
गरुड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि जब किसी व्यक्ति का जीवन अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ता है, तो उसकी कुछ इंद्रियां पहले जैसी सक्रिय नहीं रहतीं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, देखने, सुनने या स्वाद और गंध महसूस करने की क्षमता में बदलाव दिखाई दे सकता है. हालांकि चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, ऐसी स्थिति कई बीमारियों या बढ़ती उम्र के कारण भी हो सकती है. इसलिए केवल इस आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए.
2. बार-बार अशुभ या विचित्र सपने आना
धार्मिक ग्रंथों में कुछ विशेष प्रकार के सपनों का भी उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार डरावने, उदासी भरे या असामान्य सपने आने लगें, तो इसे जीवन में बड़े बदलाव का संकेत माना जा सकता है. हालांकि, मनोविज्ञान के अनुसार तनाव, चिंता, मानसिक दबाव और खराब नींद की वजह से भी ऐसे सपने आ सकते हैं. इसलिए इन्हें केवल धार्मिक संदर्भ में ही समझना उचित है.
3. सांसारिक चीजों से अचानक मोह कम होना
गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जीवन के अंतिम समय के करीब कुछ लोगों का मन धीरे-धीरे सांसारिक सुख-सुविधाओं से हटने लगता है. वे अधिक समय पूजा, ध्यान, ईश्वर स्मरण या आत्मचिंतन में बिताने लगते हैं. धार्मिक मान्यता इसे आत्मा के आध्यात्मिक यात्रा की ओर बढ़ने का संकेत मानती है. हालांकि, ऐसा व्यवहार कई बार व्यक्ति के व्यक्तिगत विचारों, उम्र या जीवन के अनुभवों का परिणाम भी हो सकता है.
4. चेहरे और व्यवहार में बदलाव दिखाई देना
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अंतिम समय के करीब व्यक्ति के चेहरे की चमक, हाव-भाव या व्यवहार में बदलाव देखा जा सकता है. कहा जाता है कि वह पहले की तुलना में अधिक शांत या गंभीर हो सकता है. हालांकि ऐसे बदलाव स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, मानसिक स्थिति या उम्र बढ़ने के कारण भी हो सकते हैं. इसलिए इन्हें किसी निश्चित संकेत के रूप में नहीं लेना चाहिए.