ट्रेन के एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे चादर, तौलिया, कंबल और तकिया देता है। इनका इस्तेमाल सफर के दौरान किया जाता है और उतरने से पहले इन्हें वापस करना होता है। लेकिन अब हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है कि कुछ यात्री इन सामानों को वापस करने के बजाय चुपके से अपने बैग में रखकर घर ले जा रहे हैं। यह कोई एक-दो मामले नहीं हैं। आरटीआई से सामने आए आंकड़ों के अनुसार पिछले चार साल में ट्रेनों से 1.27 करोड़ से ज्यादा चादर, तौलिए, कंबल, तकिए और उनके कवर चोरी हो चुके हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि चोरी से विभाग को 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राजस्थान, झारखंड, बिहार और महाराष्ट्र के रेलवे डिवीजनों में ऐसी चोरी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।
हर 1000 यात्रियों में एक ले जा रहा रेलवे का सामान
भारतीय रेलवे में हर रात लगभग 8 लाख एसी यात्री सफर करते हैं। यात्रियों को टिकट के साथ बेडरोल की सुविधा मिलती है, जिसमें दो चादर, एक कंबल, तकिया, तकिए का कवर और फेस टॉवल दिया जाता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक जांच में सामने आया कि करीब हर 1000 यात्रियों में से एक यात्री सफर खत्म होने के बाद बेडरोल का कम से कम एक सामान अपने साथ ले जाता है। रेलवे इसे लिनेन चोरी मानता है। रेलवे का सामान यात्री चोरी कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में इसका नुकसान बेडरोल अटेंडेंट को उठाना पड़ रहा है। रेलवे गायब लिनेन की कीमत ठेकेदार के बिल से वसूलता है और अटेंडेंट्स का कहना है कि इसके बाद ठेकेदार यह रकम उनकी सैलरी से काट लेते हैं।
यात्रियों ने सबसे ज्यादा तौलिए किए गायब
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे के बेडरोल से चोरी हुए सामान की लिस्ट में तौलिया सबसे ऊपर है। चार साल से ज्यादा समय में 46.54 लाख फेस टॉवल गायब हुए। इसके बाद 41.13 लाख चादर, 23.59 लाख तकिए के कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए चोरी हुए। आंकड़ों में तौलियों की चोरी सबसे ज्यादा दर्ज हुई है। अगर चार साल के आंकड़े देखे जाएं तो हर साल लिनेन चोरी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। साल 2022 में 24.83 लाख, 2023 में 29.67 लाख, 2024 में 31.31 लाख और 2025 में 38.81 लाख सामान चोरी हुए।
चोरी में राजस्थान का बीकानेर सबसे आगे
लिनेन चोरी से सबसे ज्यादा प्रभावित रेलवे डिवीजनों की बात करें तो राजस्थान का बीकानेर सबसे आगे है। यहां 25.76 लाख लिनेन सामान चोरी हुए। इसके बाद झारखंड के रांची डिवीजन में 9.31 लाख सामान गायब हुए। दिल्ली में 8.21 लाख, महाराष्ट्र के मुंबई में 8.17 लाख और राजस्थान के जोधपुर में 8.09 लाख बेडरोल सामान चोरी हुए। वहीं अहमदाबाद में 6.94 लाख और बिहार के दानापुर में 5.72 लाख सामान चोरी होने का आंकड़ा सामने आया है।
इन दो डिवीजनों में एक भी चोरी का मामला दर्ज नहीं
एक तरफ देश के कई रेलवे डिवीजनों में लाखों चादर और तौलिए गायब हो रहे हैं, वहीं तिरुचिरापल्ली और पलक्कड़ से राहत देने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इन दोनों डिवीजनों में लिनेन चोरी का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। आद्रा डिवीजन ने भी चोरी का आंकड़ा शून्य बताया है, लेकिन यहां एसी यात्री कोच नहीं चलते और यह मुख्य रूप से मालगाड़ियों का डिवीजन है।
अलग-अलग डिवीजन में यात्रियों की अलग-अलग पसंद
चोरी के आंकड़ों में अलग-अलग रेलवे डिवीजन में यात्रियों की पसंद’ भी अलग नजर आई। बीकानेर में सबसे ज्यादा 12.42 लाख चादर गायब हुईं, वहीं जोधपुर में यात्रियों ने 3.4 लाख से ज्यादा कंबलों पर हाथ साफ किया। बिहार के सोनपुर में 1.58 लाख तकिए के कवर चोरी हुए। वहीं दिल्ली, रांची, मुंबई, दानापुर, अहमदाबाद और जयपुर में तौलिए सबसे ज्यादा गायब हुए।
लिनेन चोरी है गैर-जमानती अपराध
रेलवे की चादर, तौलिया या कंबल बैग में रखकर घर ले जाना भारी पड़ सकता है। रेलवे संपत्ति कानून के तहत यह गैर-जमानती अपराध है। लिनेन वापस नहीं मिलने पर RPF संदिग्ध यात्री के सामान की तलाशी भी ले सकती है। वहीं चोरी रोकने के लिए रेलवे कोचों में CCTV लगाने के साथ Coach Mitra App का इस्तेमाल कर रहा है। इसके जरिए यात्रियों के चढ़ने-उतरने और लिनेन देने व वापस लेने का रिकॉर्ड रखा जा रहा है।

