अमरावती: आंध्र प्रदेश में अक्टूबर में होने वाली स्थानीय निकाय चुनावों से पहले एनडीए गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एनडीए की सहयोगी जन सेना पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपनाए गए सीट शेयरिंग फॉर्मूले को स्थानीय निकाय चुनावों में लागू करने के पक्ष में नहीं है। पार्टी का कहना है कि अब उसकी संगठनात्मक ताकत पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है। इसलिए उसे स्थानीय निकाय चुनावों में अधिक सीटें मिलनी चाहिए। हालांकि पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
पवन कल्याण की पार्टी का है यह मानना
जन सेना का कहना है कि पिछले चुनावों के बाद पार्टी का संगठन राज्यभर में काफी मजबूत हुआ है और इसी आधार पर उसे स्थानीय निकाय चुनावों में अधिक सीटें मिलनी चाहिए। पार्टी नेताओं के मुताबिक, 2024 में गठबंधन की मजबूती और एकजुटता बनाए रखने के लिए जन सेना ने कई सीटों पर समझौता किया था। उस चुनाव में पार्टी ने दो लोकसभा और 21 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी ने अपने गठबंधन सहयोगियों से आग्रह किया है कि सीटों का बंटवारा पुराने फॉर्मूले के बजाय वर्तमान राजनीतिक स्थिति और प्रत्येक दल के मजबूत क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए किया जाए।
पार्टी 2024 के फॉर्मूले पर निर्भर नहीं रहना चाहती
जन सेना का मानना है कि स्थानीय स्तर पर उसकी स्वीकार्यता और जनाधार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिसे सीटों के बंटवारे में भी प्रतिबिंबित होना चाहिए। राज्य के मंत्री और जन सेना की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) के चेयरमैन नादेन्दला मनोहर ने कहा कि पार्टी 2024 के फॉर्मूले पर निर्भर नहीं रहना चाहती। उन्होंने कहा कि जन सेना अपनी मौजूदा संगठनात्मक ताकत के अनुरूप उचित संख्या में सीटों की मांग करेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेलुगु देशम पार्टी के कुछ नेताओं के बीच यह चर्चा चल रही थी कि स्थानीय निकाय चुनावों में भी पिछले चुनावों वाला सीट बंटवारा अपनाया जा सकता है। हालांकि जन सेना ने इस संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है।

