पाक की कुल भूमि का 43.6 फीसदी हिस्सा केवल बलूचिस्तान का है। लेकिन इसका विकास नहीं हुआ है। करीब 1 करोड़ 30 लाख की आबादी वाले इस हिस्से में सर्वाधिक बलूच हैं, इनकी छह प्रतिशत की भागीदारी है…

रिपल्बिक ऑफ बलूचिस्तान के नाम से सोशल मीडिया पर एक स्वघोषित बयान और पत्र वायरल हुए हैं, जिसमें बलूच नेता मीर यार बलूच और कुछ पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई लड़ रहे संगठनों ने बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया है। अपना नया झंडा और राष्ट्रगान जारी करते हुए सरकार बना लेने का दावा भी किया है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने 27 पुलिसकर्मियों का आपहरण कर हत्या कर दी है। इससे बलूच आंदोलन उत्साहित हुआ है और वे जल्द कानूनी रूप में आजादी मिल जाने की उम्मीद करने लगे हंै। हालांकि इस हत्याकांड के बाद पाक सेना ने बलूचिस्तान में फ्रंटियर कोर, पुलिस व आतंकवाद निरोधक बल के साथ ऑपरेशन शाबान शुरू कर दिया है। पाक के सामने अब बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि बीएलए को इजरायली खुफिया एजेंसियों से धन, तकनीक और आधुनिक संचार उपकरण मिल रहे हैं। पाक सेना ने लडक़ों के पास से स्टारलिंग उपकरण जब्त किए हैं। पाक सेना का यह भी आरोप है कि अफगानिस्तान बीएलए को विद्रोही बलूचों ने करीब 85 प्रतिशत बलूचिस्तान की भूमि पर काबिज होने का दावा किया है। बलूच कार्यकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील भी कर दी है। यह पाकिस्तान का वह प्रमुख क्षेत्र है, जहां से चीन-पाक आर्थिक गलियारा गुजर रहा है।

इसकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यही वह क्षेत्र है जहां अत्यंत दुर्लभ खनिज एवं प्राकृतिक गैसें उपलब्ध हैं। यही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। बलूचिस्तान प्रांत में लंबे समय से स्वतंत्रता की जो लड़ाई चल रही है, वह अब सफलता के शिखर पर है। बलूचिस्तान को नए देश के रूप में मान्यता मिल जाती है तो 1971 के बाद पाकिस्तान की भूमि पर दूसरा बड़ा विभाजन दिखाई देगा। 1971 में भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी सेना को सैनिक मदद देकर पाक के दो टुकड़े कर दिए थे। अब बलूच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए दिल्ली में बलूचिस्तान का दूतावास खोलने की मांग कर रहे हैं। प्रसिद्ध लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता मीर यार बलूच को बलूच के लोगों के अधिकारों की वकालत के लिए जाने जाते हैं। बलूचों ने संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान में शांति रक्षक बल भेजने और पाक सेना को बलूच सीमा क्षेत्र से बाहर कर देने का आग्रह भी किया है। यदि बलूच स्वतंत्र देश बन जाता है तो भारत-पाक युद्ध के बीच 1971 की तरह एक युगांतरकारी घटना देखने को मिलेगी, जिसमें बलूचों द्वारा मनाए जाने वाले उत्सव में भारत भी भागीदार हो सकता है। बलूचों की स्वतंत्रता की संभावना का अहसास पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने भी जताया है। उनका कहना है कि बलूचिस्तान पर अब सेना और सरकार का नियंत्रण ढीला पड़ रहा है। यहां के हालात इतने खराब हैं कि सरकारी मंत्री तक बाहरी सुरक्षा के बिना बाहर नहीं निकल सकते हैं। सेना के जवान अपने ही देश में बंकरों में छिपे हैं। बलूचिस्तान में विद्रोह की आग चरम पर है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी आजादी की मांग करने वाला सबसे पुराना सशस्त्र अलगाववादी संगठन है। यह संगठन पहली बार 1970 में अस्तित्व में आया था। इसने जुल्फिकार अली भुट्टो के कार्यकाल में बलूचिस्तान प्रांत में सशस्त्र विद्रोह का शंखनाद कर किया था।

कालांतर में सैनिक तानाशाह जिया उल हक द्वारा सत्ता हथियाने के बाद बलूच नेताओं के साथ बातचीत हुई, जिसके परिणामस्वरूप संघर्ष विराम की स्थिति बन गई थी। नतीजतन बलूचिस्तान में सशस्त्र विद्रोह खत्म हो गया था और बीएलए का भी कोई वजूद नहीं रह गया था। किंतु कारगिल युद्ध के बाद सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ का तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली। इसके बाद मुशर्रफ के संकेत पर साल 2000 में बलूचिस्तान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नवाबमिरी की हत्या कर दी गई और मुशर्रफ ने कुटिल चतुराई बरतते हुए पाक सेना से इस मामले में आरोपी के रूप में बलूच नेता खेरबक्ष मिरी को गिरफ्तार करा दिया। इसके बाद फिनिक्स पक्षी की तरह बीएलए फिर उठ खड़ा हुआ। जगह-जगह हमले शुरू हो गए। साल 2020 में एकाएक बीएलए की ताकत बढ़ गई और बलूचिस्तान के सरकारी प्रतिष्ठानों तथा सुरक्षाबलों पर हमलों की संख्या बढ़ती चली गई। बीएलए बलूचिस्तान में चीन के प्रभाव को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करता है। उसका मानना है कि चीन बलूचिस्तान की प्राकृतिक संपदा को हड़पने का काम कर रहा है। इसी नजरिए से ग्वादर बंदरगाह को विकसित करने के साथ एक बड़ा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी बना रहा है। दरअसल भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय बलूचिस्तान को बलूचों की इच्छा के बिना बंदूक की जोर पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था। जबकि वे स्वयं को एक स्वतंत्र देश के रूप में देखना चाहते थे। अतएव पाक की स्वतंत्रता के समय से ही बलूचों का संघर्ष पाक सरकार और सेना से निरंतर बना हुआ है। बीएलए जब साल 2000 में वजूद में आया था तब इसके लड़ाकों की संख्या 6000 से भी ज्यादा थी। जिसमें करीब 150 आत्मघाती दस्ते शामिल थे। सरदार अकबर खान बुगती एक समय बलूचिस्तान के सर्वमान्य नेता रहे हैं। इसीलिए वे बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री भी रहे थे। 26 अगस्त 2006 को पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने उनकी हत्या कर दी थी। तभी से यह संगठन पाक सेना से लोहा ले रहा है।

वर्तमान में बलूच अलगाववादी और तालिबान के बीच निरंतर निकटता बढ़ रही है। वैसे भी अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के काबिज होने के बाद से पाकिस्तान में आतंकी घटनाएं बढ़ गई हैं। पाक सरकार ने भी स्वीकार किया है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ही बलूच लड़ाकों को प्रशिक्षित कर रहा है। बलूचिस्तान प्रांत में अब महिलाओं ने भी बीएलए के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बलूच नागरिकों के दमन चक्र के विरुद्ध मोर्चा खोल लिया है। इस सच्चाई को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी स्वीकारा है। पाक की आजादी के साथ बलूचिस्तान का मुद्दा जुड़ा है। पाक की कुल भूमि का 43.6 फीसदी हिस्सा केवल बलूचिस्तान का है। लेकिन इसका विकास नहीं हुआ है। करीब 1 करोड़ 30 लाख की आबादी वाले इस हिस्से में सर्वाधिक बलूच हैं, पाक की कुल आबादी में इनकी छह प्रतिशत की भागीदारी है। इसका कुल क्षेत्रफल 347190 वर्ग किमी है। यहां हिंदू, सिख और ईसाई भी रहते हैं।

इनमें आपस में खूब भाईचारा है। भगवान शिव की पत्नी सती का हिंगलाज मंदिर इसी बलूच क्षेत्र में आता है। अनेक मुसलमान भी देवी सती की पूजा-अर्चना करते हैं क्योंकि ये धर्मांतरित हंै। यहां से कभी सांप्रदायिक दंगों की खबरें नहीं आती हैं। 1999 में परवेज मुशर्रफ सत्ता में आए तो उन्होंने बलूच भूमि पर सैनिक अड्डे खोल दिए। इसे बलूचों ने अपने क्षेत्र पर कब्जे की कोशिश माना और फिर से संघर्ष तेज हो गया। इसके बाद यहां कई अलगाववादी आंदोलन वजूद में आ गए। इनमें सबसे प्रमुख बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी है। पीओके और बलूचिस्तान पाक के लिए बहिष्कृत क्षेत्र हैं। पीओके की जमीन का इस्तेमाल वह, जहां भारत के खिलाफ शिविर लगाकर गरीब व लाचार मुस्लिम किशोरों को आतंकवादी बनाने का प्रशिक्षण देता रहा है, वहीं बलूचिस्तान की भूमि से खनिज व तेल का दोहन कर अपनी आर्थिक स्थिति बहाल किए हुए है। यहां सोना, तांबा, कोयला और प्राकृतिक गैसों के बड़े भंडार हैं, लेकिन इनसे कमाई का बड़ा हिस्सा पाक सरकार, सेना और चीनी कंपनियां हथिया लेती हैं। इस कारण लोगों का गुस्सा उबाल पर है। बलूच अब अलग देश बनाने के लिए आंदोलन पर उतारू हैं। संभवत: बलूच जल्द ही आजाद हो जाएंगे।-प्रमोद भार्गव

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031  
Exit mobile version