Devshayani Ekadashi Laddu Gopal Puja Vidhi: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है और इस बार यह शुभ तिथि 25 जुलाई दिन शनिवार को है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष पूजा का भी विधान है. ज्यादातर घरों में बाल गोपाल की पूजा की जाती है और उनकी पूजा-अर्चना में कई नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर लड्डू गोपाल की पूजा में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है और इसी अनुसार सुबह से पूजा क्रम शुरू हो जाता है. मान्यताओं के अनुसार, शुभ एकादशी पर श्रद्धा और विधि-विधान से लड्डू गोपाल का स्नान, अभिषेक, श्रृंगार और भोग लगाने से भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी पर लड्डू गोपाल की पूजा में भोग समेत इन बातों का रखें ध्यान…

देवशयनी एकादशी का महत्व
देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर योगनिद्रा में चले जाते हैं. इसी के साथ चातुर्मास का आरंभ होता है, जो चार महीनों तक चलता है. शास्त्रों के अनुसार, देवशयनी एकादशी का व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, जप, तप, दान और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से पापों का नाश होता है तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल और दक्षिणा का दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इसलिए देवशयनी एकादशी को भक्ति, व्रत और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी पर्व माना गया है.

देवशयनी एकादशी पर ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा
देवशयनी एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान कर स्वच्छ एवं पीले या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर लड्डू गोपाल को आसन पर विराजमान करें. सबसे पहले शुद्ध जल से स्नान कराएं. इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें. पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और मिश्री या शक्कर का प्रयोग किया जाता है. अभिषेक के बाद पुनः गंगाजल या स्वच्छ जल से स्नान कराकर मुलायम और साफ कपड़े से भगवान को पोंछ लें.

देवशयनी एकादशी पर लड्डू गोपाल का श्रृंगार
स्नान के बाद लड्डू गोपाल को नए और स्वच्छ वस्त्र पहनाएं. देवशयनी एकादशी पर पीले रंग की पोशाक को विशेष शुभ माना जाता है. इसके साथ मोरपंख मुकुट, बांसुरी, वैजयंती माला, कंगन, करधनी और अन्य आभूषणों से उनका सुंदर श्रृंगार करें. माथे पर चंदन या केसर का तिलक लगाएं तथा पीले पुष्प, विशेष रूप से गेंदे के फूल और तुलसी दल अर्पित करें. तुलसी के बिना भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है.

देवशयनी एकादशी पर लड्डू गोपाल का भोग
भोग में सात्विक और शुद्ध पदार्थ ही अर्पित करें. भगवान को माखन-मिश्री, खीर, पंजीरी, पंचामृत, बेसन के लड्डू, फल, सूखे मेवे तथा मौसमी फलों का भोग लगाया जा सकता है. यदि व्रत के अनुसार भोग तैयार किया गया हो तो उसमें लहसुन, प्याज और तामसिक सामग्री का प्रयोग नहीं होना चाहिए. भोग अर्पित करने के बाद विष्णु मंत्र या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें और आरती उतारें. देवशयनी एकादशी पर लड्डू गोपाल को शैया पर सुंदर फूलों का आसन बिछाकर, पीली सरसों व इत्र लगाकर प्रेमपूर्वक सुलाना चाहिए.

विशेष मंगल की प्राप्ति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर श्रद्धापूर्वक लड्डू गोपाल की सेवा, अभिषेक, श्रृंगार और सात्विक भोग अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि, वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से परिवार में शांति, उन्नति और मंगल की प्राप्ति होने की मान्यता है.

(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
Exit mobile version