मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का जल्द ही ऑफिस एड्रेस बदल जाएगा। मुंबई की मशहूर एयर इंडिया बिल्डिंग अब देवेंद्र फडणवीस का नया ऑफिस बनेगी। इससे सरकार को 200 करोड़ रुपये की बचत होगी। नरीमन पॉइंट पर समुद्र के किनारे बनी 23 मंजिला एयर इंडिया बिल्डिंग को महाराष्ट्र सरकार ने 1,601 करोड़ रुपये में खरीदा था। गौरतलब हो कि एयर इंडिया बिल्डिंग 1974 में राज्य सरकार की जमीन पर बनाई गई थी। इसे शुरुआत में लोग इसकी लिफ्ट की सवारी जैसे अनुभवों के लिए यहां आते थे। एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन और टाटा ग्रुप द्वारा इसे खरीदने के बाद इस बिल्डिंग समेत इसकी गैर-ज़रूरी संपत्तियां ‘एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड’ (AIAHL) को सौंप दी गईं थीं।
महाराष्ट्र सरकार की बड़ी तैयारी
जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस के ऑफिस के अलावा मंत्रालय बिल्डिंग के बाहर चल रहे सभी सरकारी विभागों को भी इस बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा। इससे किराए के तौर पर 200 करोड़ रुपये बचने की उम्मीद है। अभी 1955 में बने मंत्रालय में जगह की भारी कमी के कारण, राज्य सरकार को आस-पास के इलाकों में लगभग नौ लाख स्क्वायर फीट जगह किराए पर लेनी पड़ी है। मुख्यमंत्री का ऑफिस सबसे ऊपर वाली मंजिल पर होगा, जबकि कैबिनेट हॉल 22वीं मंजिल पर 13,363 स्क्वायर फीट की जगह में बनाया जाएगा।
एयर इंडिया बिल्डिंग की बड़ी बातें
- यह बिल्डिंग मुंबई के नरीमन पॉइंट पर स्थित है। इसकी 23वीं मंजिल पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नया दफ्तर बनेगा।
- महाराष्ट्र सरकार ने इसे 1,601 करोड़ रुपये में खरीदा है। सरकार को इससे सालाना 200 करोड़ बचेंगे।
- इस गगनचुंबी इमारत का निर्माण वर्ष 1974 में राज्य सरकार की रिक्लेम की हुई (समुद्र से निकाली गई) जमीन पर हुआ था।
- इसे मशहूर अमेरिकी आर्किटेक्ट जॉन बर्गी ने डिजाइन किया था, जो अपने अत्याधुनिक पोस्टमॉडर्न डिजाइनों के लिए जाने जाते हैं।
- हाल ही में स्वामित्व बदलने के बाद, इमारत के ऊपर से एयर इंडिया का प्रतिष्ठित लाल रंग का ‘लोगो’ और साइनबोर्ड हटा दिया गया है, जो दशकों से मुंबई की स्काईलाइन की पहचान था।
महाराष्ट्र सरकार के पास हैं ये बिल्डिंग
एयर इंडिया बिल्डिंग में सीएमओ के शिफ्ट होने पर महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री शिवेंद्रसिंह भोसले ने कहा है कि एयर इंडिया बिल्डिंग का महाराष्ट्र सरकार को ट्रांसफर राज्य के प्रशासनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पड़ाव है। पिछले महीने मालिकाना हक ट्रांसफर होने के दौरान उन्होंने कहा था कि इस बिल्डिंग को एक मॉडल सरकारी कॉम्प्लेक्स के तौर पर विकसित किया जाएगा, जिसमें क्वालिटी, सस्टेनेबिलिटी और नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी।

