नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष ने शुक्रवार को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया जिसके कारण सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी और लोक महत्व के मुद्दों से जुड़े शून्यकाल की कार्यवाही नहीं हो सकी। सभापति सी पी राधाकृष्णन ने विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू करनी चाही विपक्ष के सदस्यों न जोर जोर से बोलना शुरू कर दिया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उन्हें नियम 267 के तहत कार्यस्थगन के प्रस्ताव का नोटिस दिया।
सभापति ने उन्हें टोकते हुए कहा कि नियम 267 का कोई नोटिस स्वीकार नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस बारे में व्यवस्था पहले ही दी जा चुकी है। उन्होंने विपक्ष के सदस्यों से कहा कि आपको दूसरों की बात भी सुननी चाहिए। आप हमेशा अपनी बात कहकर बाहर चले जाते हैं। सदस्यों द्वारा व्यवस्था का प्रश्न उठाने पर उन्होंने कहा कि यह शून्यकाल है इसमें व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। सभापति ने विपक्ष के हंगामे के बीच शून्यकाल की कार्यवाही शुरू कर दी।
विपक्ष के हंगामे के बीच एक दो सदस्यों ने अपने मुद्दे उठाये लेकिन शोर-शराबे के कारण उनकी बात नहीं सुनी जा सकी। कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर संसद में सडक़ छाप राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष संविधान और सदन की गरिमा को तार तार कर अराजकता फैलाना चाहता है। उन्होंने कहा कि हम इनकी घोर निंदा करते हैं। देश की जनता इन्हें माफ नहीं करेगी। विपक्षी सदस्य आसन के निकट आकर लगातार सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। सभापति ने सदस्यों से शांत होने तथा सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की लेकिन इसका असर न होते देख उन्होंने कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

