डेस्क : गुजरात में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में अब तक इस वायरस की वजह से 22 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य बच्चों का अस्पतालों में इलाज जारी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, संदिग्ध मामलों की लगातार जांच की जा रही है और संक्रमित बच्चों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
चूंकि यह संक्रमण मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित कर रहा है, इसलिए माता-पिता के लिए इसके लक्षण, बचाव और समय पर इलाज की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए अलर्ट
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी बच्चे में चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू किया जाए। साथ ही, उन इलाकों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं जहां सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) की संख्या अधिक है। लोगों को मिट्टी के घरों की दीवारों में मौजूद दरारों को भरने और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह भी दी गई है।
क्या है चांदीपुरा वायरस Chandipura Virus ?
चांदीपुरा वायरस एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलता है। यह एक जूनोटिक वायरस है, यानी ऐसा वायरस जो जानवरों या कीटों के माध्यम से इंसानों तक पहुंच सकता है। यह संक्रमण बच्चों में तेजी से फैल सकता है और गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) का कारण बन सकता है।
चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण
इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लग सकते हैं
लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
तेज बुखार और सिरदर्द हो
कमजोरी और थकान
शरीर और मांसपेशियों में दर्द
उल्टी और चिड़चिड़ापन होना।
भूख कम लगना
गंभीर होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण
अगर संक्रमण बढ़ जाए तो बच्चे में निम्न समस्याएं हो सकती हैं
दौरे (Seizures)
सांस लेने में तकलीफ
बेहोशी या होश कम होना
निमोनिया
दिमाग में सूजन
ऑर्गन फेलियर
ऐसे किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
क्या है इसका इलाज?
फिलहाल चांदीपुरा वायरस का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार सपोर्टिव ट्रीटमेंट, आईसीयू मॉनिटरिंग, तरल पदार्थ, ऑक्सीजन और न्यूरोलॉजिकल देखभाल के जरिए इलाज करते हैं। समय पर इलाज शुरू होने से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।
बच्चों को कैसे बचाएं?
घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
बच्चों को सैंडफ्लाई और मच्छरों से बचाने के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं।
कीट भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
घर की दीवारों और फर्श की दरारों को भरें, ताकि कीड़ों की संख्या कम हो।
बच्चों को बाहर से आने के बाद साबुन से हाथ धुलवाएं।
यदि बच्चे को तेज बुखार या दौरे जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

