भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में इस बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया। रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। आरबीआई एमपीसी की बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच आयोजित हुई है। इससे पहले जून में हुई पॉलिसी मीटिंग में भी ब्याज दरों को यथावत रखा गया था। साथ ही आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान भी बढ़ाया है।

टार्गेट से ऊपर पहुंची खुदरा महंगाई दर

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान कहा कि खुदरा महंगाई दर टार्गेट से ऊपर पहुंच गई है। उन्होंने कहा, “महंगाई में बढ़ोतरी की मुख्य वजह खाद्य और ईंधन की कीमतें हैं। कोर महंगाई अभी भी नियंत्रित बनी हुई है। इस साल की तीसरी तिमाही (Q3) में हेडलाइन महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है।” उन्होंने कहा, ‘आने वाले समय में हेडलाइन महंगाई बढ़ने का अनुमान है, जिसकी प्रमुख वजह खाद्य और ईंधन से जुड़ा आपूर्ति पक्ष का दबाव होगा। वहीं, कोर महंगाई फिलहाल मध्यम स्तर पर बनी हुई है और Q3 के बाद इसमें कमी आने की संभावना है।’ संजय मल्होत्रा ने कहा कि कीमती धातुओं (सोना-चांदी) को छोड़कर देखा जाए तो मूल महंगाई अभी भी नियंत्रित है और पहले के अनुमानों के अनुरूप बनी हुई है।

चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई के नए अनुमान

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है। यह पहले के अनुमान से 10 बेसिस प्वाइंट (0.10%) कम है। यह अनुमान पहली तिमाही के लिए 5.3%, दूसरी तिमाही के लिए 4.7%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% है।

GDP ग्रोथ रेट का अनुमान बढ़ाया

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जो पहले 6.6% था। यानी इसमें 10 बेसिस प्वाइंट (0.10%) की बढ़ोतरी की गई है। मौद्रिक नीति समिति का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में कोर महंगाई 4.3% रहेगी। उन्होंने कहा, ‘निजी खपत को विवेकाधीन खर्च का मजबूत सपोर्ट मिला है। कुल मिलाकर पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। जुलाई के पहले सप्ताह से भू-राजनीतिक तनाव दोबारा बढ़ने के कारण एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है। वहीं, पहली तिमाही के शुरुआती कॉरपोरेट नतीजे बताते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा रहा है।’

इकोनॉमी की ग्रोथ रेट बनी हुई है मजबूत

आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन चालू वित्त वर्ष में इसके पिछले अनुमान से कुछ कम रहने की संभावना है। हालांकि, वैश्विक व्यापार नीति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के कारण आगे का परिदृश्य अभी स्पष्ट नहीं है। खासकर महंगाई की दिशा और उसके स्वरूप पर अधिक स्पष्टता आने के बाद ही कोई नीतिगत फैसला लिया जाएगा।’

अल नीनो बना है महंगाई के लिए बड़ा जोखिम

संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘अल नीनो का असर महंगाई के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे निकट अवधि के महंगाई अनुमान पर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, अभी तक व्यापक स्तर पर महंगाई का दबाव सीमित है, लेकिन खाद्य, ईंधन और अन्य इनपुट लागत में बढ़ोतरी का असर आगे चलकर अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।’

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