ईंटानगर : अरुणाचल प्रदेश की पार्टी PPA ने एक बार फिर दावा किया है कि चीन की पीएलए ने अपर सुबनसिरी जिले में टक्सिंग सर्कल और उसके आस-पास के बॉर्डर पॉइंट पर घुसपैठ की। यह इलाका चीन की सीमा से सटे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी के पास है। पीपीए ने अपनी फैक्ट फाइडिंग रिपोर्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों का मुद्दा उठाया है। साथ ही, तेजी से सड़क निर्माण, सेना के पक्के बेस कैंप और बेहतर कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलप करने की मांग की है। पार्टी ने दावा किया है कि एलएसी के पास शेरा पांच पॉइंट और नांगा पहाड़ इलाके में स्थानीय लोगों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई है। अरुणाचल प्रदेश सरकार और भारतीय सेना ने पहले ही जमीन पर कब्जे के ऐसे दावों को खारिज किया है।

हाल ही में भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में 27 भौगोलिक जगहों के लिए स्टैंडर्ड नाम तय किए हैं। इन नामों के हिसाब से भारत के सर्वे ऑफ़ इंडिया ने अपना आधिकारिक मैप को अपडेट कर दिया है। इस मैप में अरुणाचल प्रदेश में 21 जमीनी इलाकों, चार दर्रों, ज़्यादा ऊंचाई वाली ग्लेशियल झील और 1962 के युद्ध के हीरो के स्मारक का नामाकरण किया गया था।

घुसपैठ समझ से परे लेकिन नकारा न जा सकने वाली है। चीनी गतिविधियां सोची-समझी, धीरे-धीरे और लगातार चलने वाली होती हैं। चीन की पीएलए कई सालों से एक ही पैटर्न का पालन कर रही हैं।

पीपीए

मैप अपडेट पर चीन का आया कमेंट

मैप अपडेट के तीन दिन के बाद चीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश और उससे सटे इलाकों को जांगनान नाम दे रखा है। चीन का दावा है कि ज़ांगनान में कुछ जगहों के लिए स्टैंडर्ड नाम जारी करना उसके संप्रभु अधिकारों के दायरे में आता है। अरुणाचल में इलाकों के नए सिरे से नामाकरण से सीमा विवाद में पेचीदगी बढ़ गई है। जबकि दोनों पक्ष सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहते हैं।कमेटी की रिपोर्ट में क्या

कमेटी के अनुसार, भारतीय सुरक्षा बल इस इलाके में साल भर गश्त करते हैं, हालांकि खराब मौसम और बाकी महीनों में भारी बारिश के कारण नियमित गश्त ज़्यादातर अप्रैल से अक्टूबर के बीच ही होती है। कमेटी ने कहा कि जमीनी हकीकत को समझने के लिए उन्होंने टक्सिंग, माज़ा और गैलेमो के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ इलाके में तैनात वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और सेना के जवानों से भी बातचीत की।

कमेटी ने दावा किया कि एक स्थानीय पढ़े-लिखे युवक ने उन्हें ‘शेरा-5’ से जुड़ी एक पुरानी घटना के बारे में बताया, जो भारतीय क्षेत्र के अंदर एक गश्त बिंदु (पेट्रोलिंग पॉइंट) है, जहां कथित तौर पर चीनी PLA सैनिकों और अरुणाचल स्काउट्स का आमना-सामना हुआ था। इसके बाद 2023 में भारतीय सैनिक शेरा-5 से हट गए और तब से उस जगह पर वापस नहीं लौटे हैं। कमेटी ने आगे दावा किया कि बाद में चीनी PLA सैनिक उस जगह पर वापस आए और कथित तौर पर शेरा-5 पर भारतीय गश्ती सैनिकों द्वारा छोड़ी गई प्रतीकात्मक निशानियों को नष्ट कर दिया और हटा दिया।

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