ईटानगर : चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों ने अपर सुबनसिरी जिले के टक्सिंग इलाके में भारतीय सेना को पेट्रोलिंग के अहम पॉइंट्स तक जाने से रोक दिया है। साथ ही, वे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास पारंपरिक भारतीय चरागाहों और शिकार के इलाकों पर धीरे-धीरे अपना कब्जा बढ़ा रहे हैं। पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी (FFC) ने यह रिपोर्ट दी है। पूर्व मंत्री और PPA के मुख्य सलाहकार काहफा बेंगिया की अगुवाई वाली चार सदस्यों की इस कमेटी ने 10 जुलाई को टक्सिंग का दौरा किया था।
कमेटी के अन्य सदस्यों में कालिंग जेरांग (उपाध्यक्ष), सोरंग किओकाम (सचिव) और नराह जिमी (सचिव) शामिल थे। टीम ने टक्सिंग, माजा और गैलेमो के स्थानीय नेताओं, बुजुर्गों और बुद्धिजीवियों के साथ-साथ इलाके में तैनात वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और जवानों से भी विस्तार से बातचीत की।
शेरा 5 पॉइंट के बारे में गंभीर दावा
सबसे गंभीर जानकारियों में से एक ‘शेरा 5 पॉइंट’ के बारे में है, जो भारत का एक तय पेट्रोलिंग पॉइंट है। कमेटी को स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, 2023 में इस जगह पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ था। इसके बाद भारतीय सेना वहां से हट गई और वापस नहीं लौटी। बाद में PLA के सैनिकों ने वहां बचे भारतीय निशानों को हटा दिया और तब से भारतीय पेट्रोलिंग टीम को उस पॉइंट तक जाने से रोक रखा है।
नांगा पहाड़ प्रतिबंधित इलाका होने का दावा
FFC ने इसे इस बात का साफ उदाहरण बताया कि कैसे चीन धीरे-धीरे घुसपैठ करके ज़मीन पर अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है। PPA टीम ने यह भी बताया कि ‘नांगा पहाड़’ – जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से नाह और मारा समुदाय शिकार और याक पालने के लिए करते थे, को अब स्थानीय लोगों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित इलाका घोषित कर दिया गया है।
कमेटी ने कहा कि इस पाबंदी की वजह से PLA को आगे बढ़ने की ज्यादा आजादी मिल गई है। घुसपैठ का तरीका सोची-समझी रणनीति के तहत, धीरे-धीरे और लगातार हो रहा है, जो पिछले कई सालों से देखे जा रहे पैटर्न जैसा ही है।
‘पीएलए की गतिविधियां साल भर चलती हैं’
टीम ने इलाके में ऑपरेशन से जुड़ी बड़ी कमियों और कमजोरियों की पहचान की, जिसमें यह बात भी शामिल है कि भारतीय सेना की पेट्रोलिंग मुख्य रूप से अप्रैल से अक्टूबर के बीच ही होती है। कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के कारण बाकी महीनों में नियमित पेट्रोलिंग रोक दी जाती है, जबकि PLA की गतिविधियां साल भर चलती रहती हैं। इसमें यह भी देखा गया कि जो पोर्टर आम तौर पर भारतीय सैनिकों के लिए सामान पहुंचाते हैं, उन्हें सर्दियों के महीनों में काम पर नहीं लगाया जाता, जिससे पता चलता है कि भारतीय सैनिकों की मौजूदगी कम है।

