आजादी के बाद जब भारत ने कारों का सफर शुरू किया, तब यहां बाहर की कंपनियों की गाड़ियां बनाई और जोड़ी जाती थीं. लेकिन समय के साथ भारत ने खुद की कारें बनाना भी शुरू कर दिया.
भारत की कारों के इस सफर में पांच गाड़ियां ऐसी रहीं, जिन्होंने अपने-अपने समय में खास जगह बनाई. कुछ गाड़ियां आजादी के बाद के शुरुआती दौर की पहचान बनीं, तो कुछ ने आम लोगों के लिए कार खरीदना आसान बनाया. इन पांच कारों की कहानी से यह भी समझ आता है कि बीते 80 सालों में भारत में कारों का बाजार कितना बदल गया. तो आइए जानते हैं इन गाड़ियों की खासियत क्या थी और आखिर इनका सफर क्यों खत्म हुआ.
महिंद्रा जीप
भारत को आजादी मिलने के उसी साल Mahindra & Mahindra ने Willys-Overland से भारत में Jeep बनाने का लाइसेंस ले लिया. 1947 में Jeep के पार्ट्स की पहली खेप भारत आई और 1949 में यहां Jeep CJ-3A बननी शुरू हो गई. उस समय भारत अभी नया-नया आजाद हुआ था और देश में सड़कें और दूसरी सुविधाएं धीरे-धीरे तैयार हो रही थीं. ऐसे में Jeep गांवों, खेतों और यहां तक कि बॉर्डर पर भी खूब काम आई. इसकी मजबूती और भरोसे ने लोगों के बीच इसे खास पहचान दिलाई. आगे चलकर यही Jeep सफर Mahindra Thar की नींव बना.

हिंदुस्तान एंबेसडर
1958 में लॉन्च हुई हिंदुस्तान एम्बेसडर को ब्रिटिश Morris Oxford के बेस्ड पर तैयार किया गया था. देखते ही देखते यह कार भारत की सड़कों की पहचान बन गई और करीब 56 साल तक लगातार प्रोडक्शन में रही. 2014 में Hindustan Motors ने बढ़ते घाटे और घटती मांग के चलते इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया.
कई दशकों तक एम्बेसडर सरकारी अधिकारियों की पसंदीदा कार रही. वहीं टैक्सी के तौर पर भी इसका खूब यूज हुआ. हालांकि, समय के साथ ज्यादा माइलेज और एडवांस्ड फीचर्स वाली कारों ने बाजार में अपनी जगह बना ली और आखिरकार एम्बेसडर का दौर खत्म हो गया.
प्रीमियर पद्मिनी
Fiat 1100 पर बेस्ड Padmini को 1964 से लाइसेंस के तहत भारत में बेचा गया. देखते ही देखते यह कार मुंबई की पहचान बन गई और इसकी पीली-काली टैक्सियों ने शहर की सड़कों पर अपनी अलग जगह बना ली. 1970 और 80 के दशक में Padmini ने Ambassador को भी कड़ी टक्कर दी.
हालांकि, 2000-01 के आसपास Fiat के साथ पार्टनरशिप कमजोर पड़ने और बाजार में मांग घटने के बाद इसका प्रोडक्शन बंद हो गया. लेकिन Padmini की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. मुंबई की सड़कों पर इसकी ‘Kaali Peeli’ टैक्सियां कई सालों तक दौड़ती रहीं. आखिरकार अक्टूबर 2023 में गाड़ियों की उम्र से जुड़े नियमों के तहत इन्हें भी सड़कों से हटा दिया गया.
मारुति 800
दिसंबर 1983 में Maruti Udyog और Suzuki ने मिलकर Maruti 800 को भारत में लॉन्च किया. उस समय इसकी कीमत सिर्फ 47,500 रुपये थी. कम कीमत की वजह से यह कार आम लोगों के बजट में आसानी से आ गई और देखते ही देखते घर-घर में पसंद की जाने लगी. जनवरी 2014 में इसका प्रोडक्शन बंद होने तक देश में इसकी 26 लाख से ज्यादा गाड़ियां बिक चुकी थीं. बाद में नए प्रदूषण नियमों के मुताबिक कार को अपडेट करना मुश्किल हो गया, जिसके बाद Maruti 800 का सफर हमेशा के लिए खत्म हो गया.
टाटा इंडिका
30 दिसंबर 1998 को लॉन्च हुई Tata Indica ने भारत की कार इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव किया. यह भारत में बनी पहली ऐसी पैसेंजर कार थी, जिसे किसी विदेशी कंपनी की मदद या लाइसेंस के बिना देश में ही तैयार किया गया था. यानी इसकी डिजाइन से लेकर इसे बनाने तक का काम भारतीय कंपनी ने खुद किया था.
लॉन्च होते ही लोगों को यह कार काफी पसंद आई. सिर्फ एक हफ्ते में ही Indica की 1.15 लाख से ज्यादा बुकिंग हो गईं. इसकी बिक्री और प्रोडक्शन लंबे समय तक चलता रहा और 2018 तक यह कार बाजार में मौजूद रही. Indica ने आम लोगों के लिए सस्ती और काम की कार का एक नया ऑप्शन पेश किया.