नई दिल्ली: उदारीकरण (Liberalisation) के बाद भले ही यह दावा किया जाता हो कि भारत के बाजारों में प्रतिस्पर्धा (Competition) बढ़ी है, लेकिन कॉरपोरेट इंडिया की तिजोरी की चाबियां आज भी चुनिंदा घरानों के ही हाथों में है। हाल ही में आई एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भारत के कॉरपोरेट जगत की कुल आय (Income Share) का 60% से अधिक हिस्सा सिर्फ पांच बड़े पारिवारिक व्यापारिक घरानों (Family Businesses) के पास है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 10 अगस्त को ‘वर्ल्ड बैंक इकोनॉमिक रिव्यू’ (World bank economic review) में प्रकाशित एक स्टडी में भारतीय व्यापारिक घरानों के एकाधिकारिक को लेकर ये बड़े दावे किए गए हैं।

कौन है कॉरपोरेट इंडिया के ‘बिग 5’?

इस अध्ययन में बताया गया है कि 2001 से 2020 के बीच के दो दशकों में जिन ‘बिग 5’ घरानों ने भारत के व्यापारिक राजस्व (business revenue) के 60% ज्यादा हिस्से पर नियंत्रण रखा है, वे हैं रिलायंस (Reliance), अडानी (Adani), टाटा (Tata), आदित्य बिड़ला (Birla) और ओम प्रकाश जिंदल (Jindal) ग्रुप।

कमाई का गणित?

टॉप 5 फैमिली में रिलायंस और अडानी ग्रुप सबसे आगे है। इन दोनों ने मिलकर कुल आय में लगातार कम से कम 20% की हिस्सेदारी कायम रखी है। वहीं स्टडी के मुताबिक टाटा और जिंदल ग्रुप की आय में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन कुल आय में इनकी हिस्सेदारी 10% से कम रही है। लेकिन दूसरी ओर स्टडी की अवधि के दौरान कुल ग्रॉस रेवेन्यू में बिड़ला ग्रुप की हिस्सेदारी धीरे-धीरेहुई है, हालांकि बाजार में इनका प्रभाव अब भी काफी मजबूत है।

किसने निभाई अहम भूमिका?

एकाधिकारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2020 में देश के शीर्ष 25 पारिवारिक घरानों का रेवेन्यू भारत की कुल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) के 15% से भी ज्यादा था।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 से 2010 के बीच इन पारिवारिक घरानों ने अपने व्यापार को तेजी से अलग-अलग सेक्टर्स (Diversification) में फैलाया है। स्टडी में पाया गया कि 74% से ज्यादा NIC-3 (National Industrial Classification) उद्योगों में इन ‘बिग 5’ कंपनियों का आधे से ज्यादा रेवेन्यू पर सीधा नियंत्रण है।

Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
Exit mobile version