राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत अगस्त के आखिरी सप्ताह में अमेरिकी दौरे पर होंगे। इस दौरे से पहले ही इसे लेकर अमेरिका में सवाल उठने शुरू हो गए हैं। दरअसल, अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिकी दौरे का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है।
RSS सदस्यों पर प्रतिबंध की मांग
इस संबंध में USCIRF के सदस्यों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी किया। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए RSS के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। USCIRF के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हैं। यह एक भारतीय संगठन है, जिसके विभिन्न सहयोगी संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, जिनमें ईसाई और मुस्लिम शामिल हैं, पर हमले करने के आरोप हैं। अब RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका आने की योजना है।’

USCIRF सदस्य जीन मिल्स ने कहा, ‘RSS के नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, उच्चस्तरीय बैठकों या राजनयिक शिष्टाचार के जरिए सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय अमेरिकी सरकार को उन RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाया गया है।’
भारतीय विदेश मंत्रालय ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF के ताजा बयानों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की कई रिपोर्टों और निष्कर्षों को पहले भी स्पष्ट रूप से खारिज करता रहा है।
कौन हैं आसिफ महमूद?
आसिफ महमूद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी चिकित्सक और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वह वर्तमान में USCIRF के अध्यक्ष हैं। उन्हें इस साल जुलाई में सर्वसम्मति से 2026-27 के कार्यकाल के लिए USCIRF का अध्यक्ष चुना गया था। महमूद डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 2022 में कैलिफोर्निया के 40वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी संसद के लिए चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वह जीत नहीं सके थे। USCIRF के अध्यक्ष के रूप में आसिफ महमूद ने भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर कई बार चिंता जताई है।