कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने के बाद कई चुनौतियों से जूझ रही ममता बनर्जी के लिए मंगलवार का दिन काफी राहत लेकर आया। सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की याचिका पार्टी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया। इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पार्टी बनाया गया है। इसके साथ कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज तीन क्रिमिनल केस में पुलिस की कार्रवाई पर 30 नवंबर तक के लिए रोक लगा दी। मई में चुनावी हार के बाद यह पहला मौका है जब ममता बनर्जी के एक साथ दो मोर्चे पर गुड न्यूज सामने आई है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने क्या कहा?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी एमपी अभिषेक बनर्जी को तीन मामलों में 30 नवंबर तक राहत देते हुए पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों से कहा है कि वह उन्हें पेश होने के लिए कहने से पहले कम से कम 48 घंटे का नोटिस दें। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह अभिषेक बनर्जी के खिलाफ तीन क्रिमिनल मामलों में 30 नवंबर तक कोई जबरदस्ती की कार्रवाई न करे। यह देखते हुए कि उनसे कस्टडी में पूछताछ जरूरी नहीं है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने डायमंड हार्बर के एमसी को जांच में सहयोग करने और पुलिस द्वारा जारी नोटिस का पालन करने का भी निर्देश दिया। जांच करने वालों से कहा गया है कि वे उन्हें पेश होने के लिए कहने से पहले कम से कम 48 घंटे का नोटिस दें। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि जब मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को हो, तो वह जांच पर एक प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करे।
20 बागियों को देना पड़ेगा जवाब
मुश्किल वक्त में ममता बनर्जी द्वारा बनाई गई पार्टी को बचाने में जुटी अभिषेक बनर्जी बागी सांसदों के मामले में राहत मिली है। बागियों की अयोग्यता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी 20 सांसदों को नोटिस जारी किए हैं।कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर के ऑफिस और सदन के सेक्रेटरी-जनरल को नोटिस जारी करने से मना कर दिया, जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह उनका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बेंच बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई, जिसमें अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसला लेने में कथित देरी को चुनौती दी गई है। सांसदों की अयोग्यता पर सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच सुनवाई करेगी। गौरतलब हो कि टीएमसी के 20 बागी सांसदों के विलय को अभी तक स्पीकर ओम बिरला ने एनसीपीआई में विलय को स्वीकृति नहीं दी है।
तीन हफ्ते के लिए विदेश जा सकेंगे अभिषेक बनर्जी
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर बनर्जी सहयोग करने में नाकाम रहते हैं तो अधिकारी सुरक्षा में बदलाव या उसे रद्द करने के लिए कोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट ने आगे आदेश दिया कि बनर्जी उसकी इजाज़त के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकते। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि इस ऑर्डर का असर सुप्रीम कोर्ट के 10 अगस्त को दिए गए उस इजाज़त पर नहीं पड़ेगा, जिसमें उन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए तीन हफ़्ते के लिए विदेश जाने की इजाज़त दी गई थी। जस्टिस भट्टाचार्य ने साफ किया कि आज पास किया गया ऑर्डर किसी भी तरह से पिटीशनर के इलाज के लिए विदेश जाने के अधिकार को कम नहीं करेगा, जो सुप्रीम कोर्ट के 10 अगस्त, 2026 को पास किए गए ऑर्डर के हिसाब से है, बशर्ते उस ऑर्डर में बताई गई शर्तों का पालन किया जाए।

