छात्रों के परीक्षा पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी सभी FIR रद्द करने केसुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली पुलिस अब उन 2,873 लोगों के मामले में आगे बढ़ सकती है, जिन्हें पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के रूप में चिन्हित किया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये पहचान 20 से 26 जुलाई के बीच जंतर-मंतर के मुख्य प्रदर्शन स्थल पर इस्तेमाल किए गए फेशियल रिकोनाइजेशन सिस्टम (FRS) के आधार पर की गई थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल चेहरे की पहचान के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति का क्षेत्र सत्यापन (field verification) किया जाएगा।

‘आपराधिक मामलों में आरोपी’ बताए गए लोगों का ब्योरा: दिल्ली पुलिस ने SC को दी जानकारी

अपराध/आरोपआरोपियों की संख्या
हत्या101
हत्या का प्रयास62
डकैती/लूट284
बलात्कार61
POCSO एक्ट06
महिलाओं से छेड़छाड़25
आर्म्स एक्ट229
झपटमारी135
अपहरण19
NDPS (ड्रग्स से जुड़े मामले)67
अन्य IPC/BNS और विशेष कानून1,884
कुल2,873

गंभीर आरोपों वाले 205 लोगों की जांच

द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में गंभीर धाराओं वाले लोगों पर ध्यान दिया गया। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, रेप और POCSO एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस के हलफनामे में 2,873 लोगों की पहचान का जिक्र है। इनमें 205 लोग ऐसे थे जिनके खिलाफ हत्या, रेप, POCSO और हत्या के प्रयास से जुड़े मामले दर्ज बताए गए हैं। इन 205 लोगों में 101 हत्या, 61 रेप, छह POCSO एक्ट और हत्या के प्रयास से जुड़े 62 में से 37 लोग शामिल थे।

इन रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि कम से कम 25 लोग ऐसे थे, जिन्हें जंतर-मंतर पर FRS ने चिन्हित किया था।

25 लोगों में हत्या के 17 आरोपी

जंतर-मंतर पर FRS से चिन्हित किए गए और उस समय जेल में बताए गए 25 लोगों में 17 लोग हत्या के आरोपी बताए जा रहे हैं। इनमें किशन, मुस्ताक, अंकित कुमार, योगेश, प्रताप सिंह सिसोदिया, अर्जुन, सोनू कुमार, विजय, राकेश, भोला उर्फ श्याम कुमार, राजा, विक्की उर्फ मनोज ठाकुर, मोहम्मद फराज, मनीष, धर्मेंद्र यादव, सोनू और रॉयल मैसी शामिल हैं।

रिकॉर्ड के मुताबिक, इनमें से कई लोग दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किए गए थे और कुछ पर हत्या के अलावा लूट, झपटमारी, चोरी, सेंधमारी और हत्या के प्रयास जैसे अन्य मामले भी दर्ज थे।

24 और 25 जुलाई को सबसे ज्यादा पहचान

इन 25 लोगों में से 3 की पहचान 24 जुलाई को FRS के जरिए हुई थी। 21 लोगों की पहचान 25 जुलाई को और एक व्यक्ति की पहचान 26 जुलाई को हुई थी। 26 जुलाई जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आखिरी दिन था।

ग्रेटर कैलाश-1 हत्याकांड से जुड़ा एक मामला

इन मामलों में से एक मामला दिल्ली में हुए चर्चित हत्याकांड से जुड़ा बताया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार, योगेश उर्फ राजू को दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 में जिम मालिक नादिर शाह की हत्या में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था। रिकॉर्ड में उसे लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा के गैंग सिंडिकेट के लिए शार्पशूटर बताया गया है। उसकी गिरफ्तारी मुठभेड़ के बाद हुई थी, जिसमें उसके बाएं पैर में गोली लगी थी।

रेप और POCSO के चार आरोपी भी सूची में

FRS से चिन्हित 205 लोगों में 4 ऐसे भी थे जिन पर दुराचार के आरोप हैं। इनमें तीन POCSO एक्ट के तहत जेल में थे। इनमें अंकित उर्फ मोगली, सुनील कुमार, हीरा सिंह और कुंदन के नाम शामिल हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, अंकित उर्फ मोगली को 2022 में पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर से गिरफ्तार किया गया था। सुनील कुमार को दक्षिण दिल्ली में POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। हीरा सिंह उत्तर-पूर्वी दिल्ली से POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था और वह 11 जुलाई 2023 से जेल में था। कुंदन भी उत्तर-पूर्वी दिल्ली से POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था।

हत्या के प्रयास के 4 आरोपी भी चिन्हित

हत्या के प्रयास से जुड़े मामलों में 4 लोगों की पहचान FRS के जरिए हुई थी। इनमें महेश, बॉबी, जिशान अहमद इदरीशी और अन्नू गिलोदिया उर्फ पहलवाल शामिल हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, इनमें से कुछ के खिलाफ झपटमारी और लूट जैसे अन्य मामले भी दर्ज थे।

पुलिस ने कहा- FRS के आधार पर अकेले कार्रवाई नहीं

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि FRS किसी व्यक्ति की पहचान करने की शुरुआती प्रक्रिया का हिस्सा है। सिस्टम किसी चेहरे के चारों ओर बॉक्स बनाकर उसे पुलिस डेटाबेस में मौजूद तस्वीरों से मिलाता है। 2022 में एक RTI के जवाब में दिल्ली पुलिस ने बताया था कि अगर सिस्टम की सटीकता दर 80 फीसदी हो तो वह मैच को पॉजिटिव मानती है।

हालांकि, FRS से मिला परिणाम अपने आप में किसी व्यक्ति की पहचान का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। इसकी क्षमता एल्गोरिदम, कैमरे के एंगल, रोशनी, तस्वीर की गुणवत्ता, मास्क और इस्तेमाल किए गए डेटाबेस जैसे कारकों से प्रभावित हो सकती है।

पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दिया था हलफनामा

बता दें कि छात्रों के जंतर-मंतर प्रदर्शन में कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग और निगरानी के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने अपना हलफनामा दाखिल किया था। 17 अगस्त को दाखिल हलफनामे में पुलिस ने कहा था कि FRS ने ऐसे लोगों की पहचान की, जिनका विवरण आधिकारिक पुलिस डेटाबेस में मौजूद रिकॉर्ड से मेल खाता था। पुलिस के अनुसार, 2,402 लोगों की पहचान दिल्ली पुलिस के बायोमेट्रिक डेटाबेस ‘क्राइम कुंडली’ से हुई, जबकि 471 लोगों की पहचान आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर हुई।

दिल्ली के नॉर्थ जिले में सबसे ज्यादा पहचान

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के नॉर्थ जिले में सबसे ज्यादा 285 लोगों की पहचान की गई। इसके बाद आउटर में 257, नॉर्थ वेस्ट में 256, नॉर्थ ईस्ट में 174, ईस्ट में 173 और साउथ वेस्ट में 166 लोगों की पहचान हुई। इसके अलावा रेलवे, शाहदरा, सेंट्रल, साउथ ईस्ट, वेस्ट, द्वारका, साउथ, रोहिणी, नई दिल्ली, क्राइम ब्रांच, आईजीआई एयरपोर्ट, मेट्रो और स्पेशल सेल जैसी इकाइयों के आंकड़े भी हलफनामे में शामिल थे। हालांकि, हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि चिन्हित किए गए लोग आरोपी, दोषी या केवल आपराधिक मामलों में नामजद व्यक्ति थे।

पुलिस बोली- पहले फील्ड वेरिफिकेशन होगा

द इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान 2,873 ऐसे लोगों की पहचान हुई, जिनके बारे में प्रथम दृष्टया आपराधिक पृष्ठभूमि होने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार, इस संबंध में आगे का सत्यापन अभी लंबित था। पुलिस के हलफनामे में कहा गया कि FRS का इस्तेमाल भीड़ में ऐसे व्यक्ति की पहचान करने के शुरुआती कदम के तौर पर किया जाता है, जिसका आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस के पास मौजूद है।

पुलिस के मुताबिक, चेहरा पहचान में आने के बाद संबंधित व्यक्ति का फील्ड वेरिफिकेशन किया जाता है। अगर सत्यापन में यह पाया जाता है कि वह व्यक्ति वास्तव में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद था, तभी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। यही वजह है कि अब 2,873 लोगों की पहचान के बाद पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती रिकॉर्ड और मौके पर मौजूदगी का वास्तविक सत्यापन करना है।

सोशल मीडिया रिएक्शन

मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। एक शख्स ने लिखा, ”हां पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन को किसी भी पॉलिटिकल प्रेशर में नहीं झुकना चाहिए लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है।

राहुल गांधी ने भी किया ट्वीट

गौरतलब है कि NEET परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी छात्र के पिता पर हुए जानलेवा हमले और दिल्ली पुलिस के रवैये को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि निशु घबराने की जरूरत नहीं है। साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों की आवाज उठाती हो। अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। तो दूसरी तरफ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।

वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट की है। जिसमें वे कह रहे है कि पहले दिन से किसी भी छात्र को उसकी मांग और हक की लड़ाई अकेले नहीं लड़ने दी है। इसी मामले में कल सुबह कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य न्याय की मांग करेंगे। वहीं, अभिजीत दीपके ने भी दिल्ली पुलिस के डीसीपी सचिन शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
Exit mobile version