Who is Siddhi Maa Neem Karoli Baba Connection: नीम करौली बाबा का नाम सुनते ही उनके चमत्कारों और कैंची धाम से जुड़ी कई कहानियां याद आती हैं, लेकिन उनकी परम शिष्या मानी जाने वाली सिद्धि मां की कहानी से शायद कम ही लोग परिचित हैं. भक्त उन्हें प्रेम से ‘श्री मां’ और ‘सिद्धि माई’ कहते थे. बाबा से उनका जुड़ाव कैसे हुआ, क्यों बाबा उन्हें खास नाम से संबोधित करते थे और ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी आध्यात्मिक परंपरा में सिद्धि मां की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण क्यों मानी गई, इससे जुड़ी कई बातें आज भी भक्तों के बीच सुनाई जाती हैं. आखिर कौन थीं सिद्धि मां और बाबा से उनके रिश्ते की कहानी क्या है, जानिए पूरी कहानी.
नीम करौली बाबा के चमत्कारों और उनसे जुड़ी कहानियों के बारे में आपने जरूर सुना होगा, लेकिन उनकी परम शिष्या मानी जाने वाली सिद्धि मां के बारे में कम ही लोग जानते हैं. भक्त उन्हें प्रेम से ‘श्री मां’ और ‘सिद्धि माई’ कहते थे. बाबा के ब्रह्मलीन होने के बाद कैंची धाम से जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा में सिद्धि मां की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी गई. श्रद्धालुओं के बीच उन्हें बाबा की आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने वाली शिष्या के रूप में सम्मान मिला.
सिद्धि मां का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा में हुआ था, बताया जाता है कि वह सात बहनों में से एक थीं. बाद में उनका विवाह नैनीताल निवासी तुलाराम साह से हुआ. उनके पति नीम करौली बाबा के परम भक्त बताए जाते हैं. पति के माध्यम से ही सिद्धि मां का जुड़ाव बाबा से हुआ और धीरे-धीरे वह भी उनकी अनन्य अनुयायी बन गईं. आगे चलकर उनका जीवन बाबा की सेवा और साधना से गहराई से जुड़ गया.
बताया जाता है कि विवाह के बाद सिद्धि मां नैनीताल में रहती थीं. उनका निवास माल रोड स्थित इंडिया होटल में भी बताया जाता है. नैनीताल की इसी पृष्ठभूमि में उनका बाबा से जुड़ाव और गहरा हुआ. पति के निधन के बाद उन्होंने सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर अपना जीवन बाबा की सेवा में समर्पित कर दिया. स्थानीय लोगों के द्वारा श्री मां से जुड़ी कई स्मृतियां आज भी श्रद्धालुओं और बाबा के अनुयायियों के बीच सुनाई जाती हैं.

