छत्तीसगढ़ – दुर्ग जिले में 6 साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में 18 महीने बाद जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी चाचा को मृत्यु दंड की सजा सुनाई है। यह घटना नवरात्रि के दौरान 7 अप्रैल 2025 को हुई थी। बच्ची की लाश खड़ी कार से बरामद हुआ था। पूरा मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है।

बता दें कि मोहन नगर थाना क्षेत्र की बच्ची नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन के लिए पड़ोस में ही रहने वाली अपनी दादी के घर गई थी। देर शाम तक जब वह घर नहीं लौटी तब परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। जब बच्ची कहीं नहीं मिली तो परिजनों ने मोहन नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

पड़ोस में खड़ी कार से बरामद हुआ था शव

पुलिस को जब बच्ची के लापता होने की जानकारी मिली तब उसकी खोजबीन शुरू की। तलाश के दौरान बच्ची का शव पड़ोस में ही खड़ी एक कार से बरामद हुआ था। बच्ची के शरीर पर चोट और खरोंच के निशान थे। इस घटना के बाद मोहल्ले के आक्रोशित लोगों ने कार में तोड़फोड़ और आगजनी कर दी थी। इस मामले में आरोपी चाचा समेत तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था। पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म की बात सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने मृतक बच्ची के शरीर से लिए गए सैम्पल और आरोपी के डीएनए जांच समान होने के बाद आरोपी की पुष्टि कर ली थी। लगभग 18 महीने के फास्ट्रैक कोर्ट में ट्रायल के बाद अब फैसला आया है।

आरोपी को मृत्युदंड, जुर्माना भी लगाया

दुर्ग पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद प्रकरण सुनवाई के लिए अपर सत्र न्यायाधीश अनिष दुबे के न्यायालय में प्रस्तुत किया था। न्यायालय ने दोष प्रमाणित होने पर आरोपी को POCSO एक्ट (लैंगिक अपराधों बालकों का संरक्षण अधिनियम) 2012 की धारा 6 (1) के तहत मृत्युदंड और पांच हजार रुपए अर्थदंड, भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (1) के तहत मृत्युदंड और पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 238 (क) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने प्रकरण की पैरवी की।

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