बेंगलुरु: कर्नाटक में कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी डॉ. अंकिता यारगल को मेडिकल ऑफिसर की नौकरी से हाथ धोना पड़ा। डॉ. अंकिता पिछले मार्च से ड्यूटी पर नहीं आ रही थीं। जांच के दौरान पता चला कि वह एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में पोस्ट-ग्रेजुएट पढ़ाई कर रही है। बागलकोट जिला पंचायत के CEO गजानन बाले ने बताया कि ड्यूटी में लापरवाही और बिना इजाज़त दो जगह काम करने के आरोपों के चलते उनके खिलाफ जांच भी शुरू की गई है। नियमों के हिसाब से नौकरी के दौरान रेग्युलर कोर्स में पढ़ाई नहीं की जा सकती है।
हर महीने 70 हजार रुपये ले रही थी सैलरी
बागलकोट के कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी डॉ. अंकिता यारगल सरकारी नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर तैनात थीं। उन्हें हर महीने 70 हजार से ज्यादा सैलरी मिल रही थी। पिछले मार्च से ही वह ड्यूटी से लापती रही, मगर वेतन उनके अकाउंट में क्रेडिट होता रहा। शिकायत मिलने के बाद जब जांच शुरू हुई तो पता चला कि डॉ. अंकिता एस. निजलिंगप्पा मेडिकल कॉलेज से पीजी कर रही है। गजानन बाले ने बताया कि डॉ. यारगल को एक नोटिस जारी किया। उन्हें बुधवार को पहली जांच के लिए पेश होने का निर्देश दिया गया था, मगर वह नहीं आईं। अब उन्हें जरूरी डॉक्युमेंट्स और लिखित स्पष्टीकरण के साथ 18 सितंबर को जिला पंचायत सीईओ ऑफिस में तलब किया गया है।
डॉ. अंकिता के पिता हैं जिला स्वास्थ्य अधिकारी
गजानन बाले ने बताया कि प्रफेशनल करप्शन के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। इस मामले को कर्नाटक मेडिकल काउंसिल (KMC) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के पास भेजा जा सकता है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगली जांच में पेश न होने पर उनका पक्ष सुने बिना ही कोई फैसला लिया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. अंकिता यारगल के पिता राजकुमार यारगल जिला स्वास्थ्य अधिकारी हैं। आरोप है कि डॉ. यारगल ने ही अपनी बेटी की मेडिकल ऑफिसर के तौर पर पोस्टिंग की थी। उनके पिता ने दावा किया है कि उनकी बेटी ने एमडी कोर्स में एडमिशन होने के बाद से कोई सैलरी नहीं ली है। फिलहाल डॉ. यारगल पर लगे आरोपों की अभी आधिकारिक जांच चल रही है।

