नई दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर पटकथा लेखक जावेद अख्तर भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के बारे में किए गए एक दावे पर पत्रकार आनंद रंगनाथन से ट्विटर पर भिड़ गए। यह विवाद रंगनाथ के एक रील की वजह से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने मौलाना आजाद के काफिर वाले एक भाषण को कोट किया था। जावेद अख्तर मानने के लिए तैयार नहीं थे कि मौलाना ने कभी ऐसा कहा होगा। इसपर रंगनाथन ने सबूत भी दिया और उन्हें ट्वीट डिलीट न करने की चुनौती भी दे डाली।
‘बताइए मौलाना आजाद ने कब और कहां कहा’
जावेद अख्तर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पहले आनंद रंगनाथन से पूछा, ‘हाल में आपने अपने एक रील में एक पैराग्राफ पढ़ा और कहा कि यह मौलाना आजाद ने कहा था। सच बताऊं तो मुझे उनके पूरे जीवन भर के सामाजिक-राजनीतिक सोच से पूरी तरह से अलग लगा।’
क्या आप मुझे अपनी जानकारी का स्रोत बताएंगे, क्या यह उनके किसी लेख या भाषण का हिस्सा है। प्लीज मुझे बताइए ये कब और कहां का है। मैं सही में शुक्रगुजार रहूंगा। शुभकामनाओं के साथ, जावेद
जावेद अख्तर, पटकथा लेखक
मौलाना आजाद के उस भाषण का दिया सबूत
इसपर आनंद रंगनाथन ने उन्हें अपने जवाब में बताया, ‘यह कोट मौलाना आजाद के कलकत्ता संबोधन से लिया गया है। यह संबोधन खुत्बात-ए-आजाद में छपा था। यहां लिंक है..।’ यहां पर उन्होंने वह लिंक शेयर किया है, जिसमें मौलाना आजाद के उन शब्दों को उकेरा गया है।
मौलाना आजाद ने मुसलमानों को लेकर क्या कहा था?
इसके बाद रंगनाथन ने मौलाना आजाद के उस भाषण का पूरा मर्म समझाया और वह सारी बात साझा की, जो खुत्बात-ए-आजाद में उनके हवाले से आज भी मौजूद है। इसमें वे भारतीय मुसलमानों को दुनिया भर के मुसलमानों के साथ खिलाफत को बचाने के लिए कह रहे हैं। वह यहां तक कह रहे हैं कि पिता का पुत्र से, मां का बेटे से, भाई का भाई से रिश्ता टूट सकता है, लेकिन एक मुसलमान का दूसरे मुसलमान से कभी भी रिश्ता नहीं टूट सकता।
मौलाना आजाद ने काफिरों को लेकर क्या कहा था?
उन्होंने मौलाना आजाद के भाषण का वह कोट भी सामने रखा, जिसको लेकर जावेद अख्तर को काफी बेचैनी हो रही थी। उन्होंने आजाद को कोट करते हुए कहा, ‘काफिरों (विश्वास न करने वालों) के खिलाफ बेहद सख्त रहें, लेकिन आपस में उतनी ही एकता और दया बनाए रखें।’ रंगनाथन ने रील में भी यही बात बताई थी, जिससे सारा विवाद शुरू हुआ।
‘अब गांधी के बारे में मत पूछिएगा’
- रंगनाथन ने अख्तर से कहा कि यह दूसरी बार है, जब उनके हीरो के बारे में वास्तविकता बता रहे हैं।
- उनके मुताबिक पहली बार उन्होंने यह मानने से मना कर दिया था कि नेहरू के शासन काल में किताबें बैन की गई थीं, संपादकों को हटाया गया था, फिल्में रोकी गई थीं और मजरूह सुल्तानपुरी को नेहरू के खिलाफ कविता पढ़ने की वजह से जेल भेज दिया गया था।
प्लीज अब गांधी के बारे में मत पूछिएगा, महात्मा के बारे में, न कि राहुल के बारे में, हालांकि, शायद दोनों ही आपके हीरो हैं। धन्यवाद, ट्वीट डिलीट मत करना।
आनंद रंगनाथन, पत्रकार
‘पैराग्राफ उठाकर उसे मौलाना आजाद का बताना?’
- रंगनाथन के लंबे-चौड़े जवाब के बाद जावेद अख्तर ने उनके लिए फिर दो ट्वीट किए। पहले में उन्होंने कहा, ‘धन्यवाद, तो यह मौलाना आजाद का किया कुरान के शब्दश: अनुवाद का एक हिस्सा है। उन्होंने यह अनुवाद किया या नहीं ये चर्चा का मुद्दा हो सकता है, पर उस अनुवाद के किसी एक पैराग्राफ को उठाकर उसे मौलाना आजाद का संबोधन बताना??? निश्चित तौर पर ईमानदार और निष्पक्ष नहीं है।’
- दूसरे ट्वीट में जावेद अख्तर ने यह दलील देने की कोशिश की है कि ‘मौलाना आजाद का संबोधन खिलाफत और ब्रिटिश उपनिवेशवाद को लेकर था। यह दावा करना कि मौलाना आजाद (काफिर)यह भारत के हिंदुओं के लिए कह रहे थे, सही नहीं होगा। काफिर का यह संदर्भ औपनिवेशिक शासकों के लिए था।’
- उन्होंने रंगनाथन से कलकत्ता हाई कोर्ट में आजाद के दिए उस बयान को भी पढ़ने के लिए कहा, जब उनपर देशद्रोह के आरोप लगाए गए थे। इसके लिए उन्होंने आरएसएस और हिंदू महासभा को भी घेरने की कोशिश की।
- उन्होंने दावा किया कि ‘आजाद इतने देशभक्त थे कि जिन्ना उनसे हाथ मिलाने के लिए भी तैयार नहीं हुआ।’ जावेद अख्तर ने गुजारिश की कि मौलाना आजाद के बारे में ‘निष्पक्ष’ रहें।
- हालांकि, राहुल गांधी का जिक्र करने पर उन्होंने मायूसी जाहिर की और उम्मीद की कि भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे।

