लखनऊ: उत्तर प्रदेश मिलावटी खाद्य सामग्री का प्रदेश बनता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में राज्य में खान-पान में मिलावट के ऐसे-ऐसे मामले सामने आए हैं, जो हैरत में डालने के साथ चिंता बढ़ाने वाले हैं। नकली लहसुन , मिलावटी काली मिर्च से लेकर मिलावटी तेल, नकली दूध, खोया और पनीर तक बनाकर बेचा जा रहा है। बाजार में मिलने वाली मिठाईयों पर भी आंख बंद करके भरोसा मत कर लीजिए, नकली छैने का रसगुल्ला भी बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है, जिससे उनकी करतूतों के खुलासे हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ योगी सरकार और खाद्य सुरक्षा विभाग (FSDA) ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान चला रखा है। मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए छापेमारी की जा रही है, संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है और भारी मात्रा में नकली खाद्य सामग्री को जब्त किया जा रहा है।
मिलावटी काली मिर्च
हाल ही में गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर इलाके में एक अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ। इसमें मैदा, गोंद और रिफाइंड सोयाबीन तेल मिलाकर घटिया स्तर की काली मिर्च को चमकीला और बड़ा बनाकर नकली काली मिर्च तैयार की जा रही थी। इस फैक्ट्री से खाद्य विभाग ने करीब 13.34 लाख रुपये की मिलावटी काली मिर्च बनाने की सामग्री जब्त की है। काली मिर्च में पपीते के सूखे बीज और नकली बेरी जैसी चीजों की मिलावट भी की जाती है।
असली काली मिर्च को ऐसे पहचानें
मिलावटी काली मिर्च की पहचान करने के लिए उसे पानी डालें। यदि वह असली है तो वह वह तुरंत पानी की तली में बैठ जाएगी। यदि उसमें पपीते के बीज या हल्के नकली दाने मिले हैं, तो वे पानी की सतह पर तैरने लगेंगे। असली काली मिर्च बहुत सख्त होती है। उसे किसी ठोस सतह पर रखकर दबाएं तो वह आसानी से दबती या टूटती नहीं है। नकली दाने दब जाते हैं या आसानी से टूट जाते हैं। अल्कोहल में काली मिर्च के दाने डालें। यदि वह असली है तो उसके दाने अल्कोहल में नीचे बैठ जाएंगे, नकली दाने तैरते रहेंगे। यदि काली मिर्च को हथेली पर रगड़कर उसे सूंघ जाए तो शुद्ध काली मिर्च की तीखी प्राकृतिक खुशबू आती है। नकली या मिलावटी काली मिर्च में कोई खुशबू नहीं होती या मिट्टी जैसी अजीब गंध आती है।

