Viral Video: करीब डेढ़ साल ऋषिकेश में बीतने के बाद डच फिल्ममेकर ईशा ब्रैंडरहोर्स्ट ने भारत छोड़ दिया था, लेकिन 4 महीने बाद भी वे इस देश को नहीं भूला पाईं. हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने बताया कि भारत आने से पहले उन्हें दुनिया में कहीं भी कभी अपनापन महसूस नहीं हुआ था. उत्तराखंड का ऋषिकेश ही एक मात्र शहर था, जहां उन्हें अपनापन महसूस हुआ.
‘मैं लंबे समय से रो नहीं पा रही थी’
ब्रैंडरहोर्स्ट ने कहा, ‘जब तक मैं ऋषिकेश में पुल पर नहीं चली, तब तक मुझे कभी अपनापन महसूस नहीं हुआ था. वहां अचानक मुझे यह एहसास हुआ और मैं रोने लगी. आपको बता दूं कि मैं इतने लंबे समय से रो नहीं पा रही थी क्योंकि मैंने अपने चारों ओर एक सख्त परत बना रखी थी और खुद को बहुत बचाने की कोशिश कर रही थी. लेकिन ऋषिकेश में जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ी, मेरी आंखों से आंसू बहने लगे.’
एक यूजर ने कहा, ‘ऋषिकेश का माहौल और वहां की एनर्जी बहुत अलग है. जब भी मैं वहां जाता हूं, मेरे साथ भी ऐसा ही होता है.’
दूसरे यूजर ने लिखा, ‘उस मिट्टी से आपका भावनात्मक जुड़ाव था. आपको वह मिल गया जिसकी आपको तलाश थी. भगवान आपका भला करे.’
तीसरे यूजर ने कमेंट किया, ‘भारत के हर शहर में किसी न किसी देवता का वास होता है. जैसे ऋषिकेश महादेव का है और वृंदावन कृष्ण का. अगर आप परमात्मा-तत्व के करीब हैं, तो आप इसे अवचेतन रूप से महसूस करेंगे. और हां, यह बिल्कुल सच है. पवित्र स्थलों के बारे में सोचकर ही मेरी भी आंखें भर आती हैं.’
चौथे यूजर ने कहा, ‘भारत आपकी उस पहचान को खत्म कर देता है जिसे आप ढोते रहते हैं, और आपको अपनी उस छवि से अलग कर देता है जो आपने अपने बारे में बना रखी है. वह छवि ही एक बोझ बन जाती है. आपको उसे बचाना होता है, उसे सही ठहराना होता है और लगातार उसे बनाए रखना होता है. आप अपनी छवि को बनाए रखने में इतना समय बिता देते हैं कि असल में जीना ही भूल जाते हैं.’

